सदर ब्लाक के चौकिया गांव में पिछले दिनों नौ दिनों के अंदर चार बच्चों की मौत गलसुआ, फालिज और कुपोषण से हुई थी। मृत बच्चों में बीमारी के लक्षणों की जानकारी लेने के बाद यह दावा स्वास्थ्य विभाग की टीम ने किया है। पिछले
दिनों एक जिला पंचायत सदस्य ने बच्चों की मौत डिप्थीरिया से होने की आशंका जताई थी जिसे स्वास्थ्य विभाग ने पूरी तरह से खारिज कर दिया। फिलहाल अब मौत का कारण बनी तीन बीमारियों के सामने आने के बाद हड़कंप मचा है।
स्वास्थ्य विभाग टीम ने गांव में टीम भेज कर न सिर्फ बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया बल्कि 436 बच्चों को टीका लगवाया गया। चौकिया गांव में सोमवार को पहुंची जांच टीम ने गांव के शून्य से पांच वर्ष तक के बच्चों का स्वास्थ्य
परीक्षण किया। साथ ही बच्चों को डीपीटी, खसरा, हेप्टाइटिस और दिमागी बुखार का टीका लगाया।
मालूम हो कि चौकिया निवासी राजू बिंद का डेढ़ वर्षीय पुत्र शिवम, बबलू कुरैशी के पुत्र बुखार, खासी, गले में सूजन और
मुंह के छाले से पीड़ित थे। दोनों की मौत निजी अस्पताल में इलाज के दौरान बीते शनिवार को हो गई थी। इससे राजदेव बिंद की पुत्री और साहेब कन्नौजिया की पुत्री की मौत भी इलाज के दौरान कुछ दिन पूर्व हुई थी। ये दोनों भी खांसी और
बुखार से पीड़ित थे। बीते शनिवार को चार बच्चों की मौत की जानकारी होते ही सीएमओ ने गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच के लिए भेजी थी। टीम ने बीमारी के लक्षण की जानकारी परिजनों से ली। इसमें डिप्थीरिया बीमारी के लक्षण
नहीं होने के बात की पुष्टि हुई।
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चौकिया गांव में चार बच्चों की मौत डिप्थीरिया से नहीं हुई थी। इनमें से दो बच्चों की मौत गलसुआ और तीसरे की फालिज और चौथे की मौत अति कुपोषण के चलते हुई थी। स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव में गई तथा बच्चों का स्वास्थ्य
परीक्षण किया है। इस दौरान 436 बच्चों को टीके लगाए गए। गांव के अन्य सभी बच्चे स्वस्थ हैं।
-डा. आरके सिन्हा, जांच अधिकारी स्वास्थ्य विभाग