एमएलए थे पर क्षेत्र में चलते थे साइकिल से
जब जनपद में सीपीआई (भाकपा) की तूती बोलती थी। चहुंओर लाल परचम लहरा रहा था। उस दौर में शिवशंकर यादव कांग्रेस के बैनर तले चुनाव लड़े और पहली बार सत्ताधारी पार्टी का विधायक बन कर मिसाल कायम की थी। उन्होंने उस समय कांग्रेस का दामन थामा जब पूरे जिले में सरजू पांडेय की चलती थी।आजादी के आंदोलन में हिस्सा लेने वाले सेनानी शिवशंकर यादव कासिमाबाद विकासखंड के सबसे पिछड़े गांव बूढ़नपुर के मूल निवासी थे। सरजू पांडेय और शिवशंकर यादव ने एक ही साथ पढ़ाई की और दोनों की शिक्षा एक समान है। 15 अगस्त 1942 को शिवशंकर यादव, सरजू पांडेय सहित अनेक सेनानियों ने कासिमाबाद थाना फूंका था।
शिवशंकर यादव और सरजू पांडेय की जोड़ी एक थी। किसी ने नहीं सोचा था कि एक साथ रहने वाले दोस्त कभी अलग-अलग पार्टी से राजनीति करेंगे। तब कांग्रेस पार्टी को कासिमाबाद विधानसभा क्षेत्र से राजनीति करने के लिए लंबे समय से एक अच्छे व्यक्ति की तलाश थी। तब विधान परिषद सदस्य विंध्याचल राय ने चुनाव लड़ने के लिए शिवशंकर यादव को मना लिया। वह कांग्रेस के झंडा तले चुनाव लड़े और पहली बार 1959 में वह विधायक चुने गए।
इसके बाद शिवशंकर यादव ने कासिमाबाद विधानसभा क्षेत्र के मरदह में विद्युत उपकेंद्र एवं बाराचवर में भी एक सब-स्टेशन स्थापित कर क्षेत्र में पहली बार बिजली लायी। इसी तरह रामगढ़ पंप कैनाल की स्थापना कर क्षेत्र में सिंचाई का मार्ग प्रशस्त किया। देवकली राजवाहा भी इन्हीं की देन है। इस समय पूरे कासिमाबाद विधानसभा क्षेत्र में सिंचाई के लिए कुल 30 ट्यूबवेल लगाए गए थे।
शिवशंकर यादव पूर्व मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी एवं चंद्रभान गुप्त के काफी करीबी थे। उन्होंने कभी जात-पात की राजनीति पर विश्वास नहीं किया। यही कारण रहा कि चौधरी चरण सिंह के बार-बार कहने के बाद भी उनके साथ नहीं गए और आजीवन कांग्रेस में ही रहे। वर्ष 1974 के विधानसभा चुनाव में शिवशंकर रघुवीर राम से हार गए थे। शिवशंकर यादव काफी सरल और शांत स्वभाव के व्यक्ति थे। सरजू पांडेय पर गरीबों की मदद न करने का आरोप लगाकर बड़ों का काम करने का मुद्दा चुनाव में उठाया थ