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UP: दुष्कर्म के आरोपी को सात साल, आठ माह और 13 दिन बाद मिली 10 वर्ष की सजा; 40 हजार रुपये का अर्थदंड

Sat, 06 Jun 2026 06:58 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, गाजीपुर।

सार

Ghazipur News: गाजीपुर में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो प्रथम रामअवतार प्रसाद की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषी गौतम को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। न्यायालय ने उस पर 40 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। जुर्माने की 50 प्रतिशत राशि पीड़िता को देने का आदेश दिया गया है।
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दुष्कर्म के आरोपी को कठोर कारावास की सजा। - फोटो : अमर उजाला
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UP News: गाजीपुर में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो प्रथम रामअवतार प्रसाद की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषी पाए गए युवक गौतम को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी पर 40 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। साथ ही आदेश दिया है कि अर्थदंड की राशि का 50 प्रतिशत हिस्सा पीड़िता को दिया जाए।

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अभियोजन के अनुसार, खानपुर थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी व्यक्ति ने वर्ष 2018 में थाने में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसकी नाबालिग पुत्री से गांव का एक युवक मोबाइल फोन पर बातचीत करता था। आरोप था कि 24 सितंबर 2018 की सुबह करीब 10 बजे युवक उसकी पुत्री को बहला-फुसलाकर अपने साथ भगा ले गया।

तहरीर के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की। जांच के दौरान पुलिस ने पीड़िता को बरामद कर उसका चिकित्सीय परीक्षण कराया। न्यायालय में दर्ज कराए गए बयान में पीड़िता ने बताया कि गांव का ही गौतम उसे अपने साथ ले गया था। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

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विवेचना पूरी होने पर पुलिस ने आरोपी गौतम के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह पेश किए गए। गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया।

विशेष न्यायाधीश रामअवतार प्रसाद ने शनिवार को अपना फैसला सुनाते हुए दोषी गौतम को 10 वर्ष के कारावास और 40 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही जुर्माने की आधी राशि पीड़िता को प्रदान करने का निर्देश दिया। फैसला सुनाए जाने के बाद दोषी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। न्यायालय के इस निर्णय को बाल यौन अपराधों के मामलों में सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
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