विवेचना पूरी होने पर पुलिस ने आरोपी गौतम के खिलाफ पॉक्सो एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं में आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से सात गवाह पेश किए गए। गवाहों के बयान, दस्तावेजी साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया।
विशेष न्यायाधीश रामअवतार प्रसाद ने शनिवार को अपना फैसला सुनाते हुए दोषी गौतम को 10 वर्ष के कारावास और 40 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। साथ ही जुर्माने की आधी राशि पीड़िता को प्रदान करने का निर्देश दिया। फैसला सुनाए जाने के बाद दोषी को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। न्यायालय के इस निर्णय को बाल यौन अपराधों के मामलों में सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है।