मांग कम हुई तो मखदुमपुर में अनरसा बनाने वाले भी इस मिठाई के निर्माण से अलग होते गए। इस समय मात्र चार से पांच परिवार ही अनरसा बनाने के व्यवसाय में लगे हुए हैं। मखदुमपुर बाजार में अनरसा व्यवसायी योगेश गुप्ता ने बताया कि यह हम लोगों का पुश्तैनी व्यवसाय हैं। वर्षों पहले जितनी बिक्री होती थी, वर्तमान में उसकी आधी बिक्री भी नहीं हो पाती। चावल के दाम में वृद्धि हुई है, लेकिन अनरसा का भाव पुराना ही है। अनरसा की कीमत 100 रुपये प्रति किलो है। मगर गुड़ वाला अनरसा बाजार से गायब होता जा रहा है।
महंगूू गुप्ता और राधेश्याम गुप्ता बताते हैं कि मिठाई बनने में जितनी मेहनत लगती है, उसके हिसाब से लाभ कम होता है। लिहाजा लोग इसे छोड़ते जा रहे हैं। बाजार में तरह-तरह की मिठाइयां आ गई हों, लेकिन सावन माह में बहू-बेटियों को तीज-त्योहार भेजते समय लोगों को अनरसा की याद आ ही जाती है।