मकर संक्रांति का पर्व जनपद के कई इलाकों में गुरुवार को भी मनाया गया। भोर से ही गंगा स्नान के लिए श्रद्धालुओं का तटों पर पहुंचना शुरू हो गया था। स्नान कर पूजन-अर्चन कर लोगों ने ब्राह्मणों एवं गरीबों को दान किया। बच्चों
एवं युवाओं ने मैदानों तथा घर की छतों से जमकर पतंगबाजी की। खुशगवार मौसम होने के कारण बच्चे और युवा
दिन में पतंग उड़ाने में लगे रहे। बाद में लोगों ने दही-चूड़ा के साथ खिचड़ी का सेवन किया।
मुहूर्त के अनुसार, शहर सहित ग्रामीणों क्षेत्रों के कई लोगों ने गुरुवार को मकर संक्रांति का पर्व मनाया। पर्व पर लोगों ने परिवार के सुख-समृद्धि की कामना की। गंगा स्नान का जो क्रम भोर से शुुरु हुआ, वह दोपहर तक चलता रहा।
घाटों के आसपास भीड़ बनी रही। मकर संक्रांति पर सुबह लोगों ने दही-चूड़ा और रात में खिचड़ी खाई। परिवार के लोगों के खिचड़ी का सेवन करने के साथ ही अधिकांश लोगों ने इसका वितरण पास-पड़ोस के लोगों में किया।
मकर संक्रांति पर पतंगबाजी का महत्व है। सुबह से शुरू हुआ पतंगबाजी का सिलसिला शाम तक बना रहा। घर की छत एवं आसपास के मैदानों से लोगों विशेषकर बच्चों ने खूब पतंगबाजी की। पतंग के शौकीनों ने थोक के भाव में
पतंगे खरीदकर रखी थी। जैसे ही एक पतंग कट रही थी, वह दूसरी पतंग उड़ाने की तैयारी करने लग रहे थे। पतंग की दूकानों पर खरीददारों की भीड़ शाम तक बनी रही।