सावन के तीसरे सोमवार को देवाधिदेव का जलाभिषेक करने के लिए शहर में रविवार को कावंरियों की भीड़ उमड़ी। ददरीघाट और चीतनाथ घाट पर गंगा स्नान करने के बाद कावंरिए पद यात्रा करते हुए महाहर धाम को रवाना हुए। इस
दौरान उनके द्वारा बोलबम और हर-हर महादेव का जयघोष किए जाने से आसपास का माहौल पूरी तरह से शिवमय बना रहा। सुरक्षा व्यवस्था की दृष्टि से पर्याप्त संख्या में पुलिस कर्मी मौजूद थे।
रविवार की दोपहर बाद से पैदल तथा निजी वाहनों से कावंरियों के शहर में आने का सिलसिला शुरु हो गया। जैसे-जैसे दिन ढलता गया, वैसे-वैसे कावंरियों की संख्या में इजाफा भी होता गया। शाम पांच बजे तक शहर में चारों तरफ
कावंरिया दिखाई देने लगे। विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों के कुछ कावंरिया प्राइवेट वाहनों से तो कुछ निजी साधन से आए थे। पहले कावंरिए मिश्रबाजार में रुके। इसके बाद दर्जनों की संख्या में सजी पूजा सामग्री की दूकानों से कावंर, लुटिया
सहित अन्य पूजा के सामानों की खरीदारी की। इसके बाद गंगा घाटों के लिए रवाना हुए। कावंरियों की सबसे ज्यादा भीड़ ददरीघाट और चीतनाथ घाट पर रही। घाटों पर भोले के भक्तों ने गंगा स्नान के बाद पूजन-अर्चन किया। इसके बाद
कावंर में जल लेकर पदयात्रा करते हुए जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर मरदह के महाहर धाम के लिए रवाना हुए। घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ के कारण मेले जैसी स्थिति बनी रही। कांवरियों की भीड़ के चलते गाजीपुर-मऊ मार्ग
पर पूरी रात वाहनों की रफ्तार धीमी रही। देर रात तक गंगा स्नान के बाद कावंरियों के रवाना होने का क्रम बना रहा।