जिले में इस बार दो लाख हेक्टेयर में गेहूं की खेती की गई थी। गाजीपुर सदर, जमानिया, मुहम्मदाबाद, सैदपुर, जखनिया क्षेत्र के गांवों में बड़े पैमाने पर गेहूं की बोआई की गई है। दुबिहा के किसान पारसनाथ राय, बखरियाडीह के रमाशंकर यादव, कमसड़ी के रवींद्र राय, पैकवलिया के लक्षमीना बिंद, रामचंद्र, दिलदारनगर के कन्हैया कुशवाहा, सूर्यभानपुर के पप्पू यादव ने बताया कि एक बीघे गेहूं की खेती में 5 से 6 हजार रुपये की लागत आई है।
यह रकम 40 किलो बीज, 40 किलो डीएपी, 40 किलो यूरिया, 20 किलो पोटाश, तीन सिंचाई और जुताई पर खर्च की गई है। लेकिन पिछले दिनों बेमौसम बारिश, ओले गिरने और आंधी से खेतों में लहलहा रही गेहूं की फसल लोट गई। लिहाजा बारिश के साथ गीली मिट्टी चढ़ने से गेहूं की फसल मिट्टी से चिपक गई। इसके चलते अधिकांश खेतों मेें गेहूं की डंठल आधे से अधिक सड़ गई। फसल में दाने नाममात्र के पड़े और जो पड़े भी हैं, वह बेहद कमजोर हैं। यही नहीं बारिश के बाद धूप होने से अब ये दाने काले पड़ गए हैं। एक बीघे खेत में करीब 10 कुंतल गेहूं की उचित पैदावार होनी चाहिए लेकिन फसल बर्बाद होने से 3 से 4 कुंतल गेहूं निकलना भी मुश्किल हो गया है।
ऐसे में जाहिर है कि गेहूं की गुणवत्ता तो दूर की बात काफी हद तक पैदावार घटी है। आने वाले दिनों में इसका असर दिखा तो गेहूं की रोटी मिलनी मुश्किल हो सकती है। गेहूं के दाम बढ़ेंगे तो जाहिर है आटा भी महंगा होगा। यही नहीं गेहूं का डंठल सड़ने से मड़ाई में भूसा नाममात्र का निकलने से आगे जानवरों के समक्ष भी भूसे का संकट गहराना तय है। ऐसे में अभी 350 से 400 रुपये प्रतिमन बिकने वाला भूसा और महंगा हो सकता है।