पिछले पांच दिनों से मौसम का तेवर काफी तल्ख है। एक तरफ जहां आसमान से आग बरसने से लोगों का तन झुलस रहा है, तो वहीं दूसरी तरफ उमस भरी गर्मी लोगों को बेचैन कर रही है। कूलर और एसी के बीच रहने पर तो गर्मी से थोड़ी राहत मिल जा रही है, लेकिन पंखे की हवा से लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। धूप से बचाव के लिए लोग टोपी, गमछा और छाता का सहारा ले रहे हैं। बावजूद इसके तवे की तरफ तप रही दोपहरी और गर्मी से लोग घरों में दुबकने के लिए विवश हो जा रहे हैं।
रविवार को तीखी धूप का आलम यह रहा कि खुले आसमान के नीचे की कौन कहे, बंद कमरे में भी लोगों को गर्मी सताती रही। मार्गों पर वहीं लोग आवागमन करते नजर आ रहे थे, जिनकी कुछ मजबूरी थी। इसकी वजह से शहर की जहां अधिकांश सड़कें सूनी थीं, वहीं बाजारों में भी सन्नाटा पसरा हुआ था।
लोग धूप के बीच मार्गों पर आवागन कर रहे थे, उन्हें जैसे ही यह महसूस हो रहा था कि अब उनसे धूप बर्दाश्त नहीं होगी, वह दूकानों के टिनशेडों, मकानों के बारजे और पेड़ के नीचे ठहर जा रहे थे। कुछ आराम मिलने के बाद ही लोग आगे के लिए बढ़ रहे थे। धूप से बचने के लिए लोगों ने टोपी, गमछा के साथ छाता का सहारा लिया। उमस की स्थिति यह थी कि इससे पूरा शरीर बेचैन हो रहा था। गर्मी की वजह से पल-पल पर लोगों को पानी की जरूरत महसूस हो रही थी। आम हो या खास, सभी मौसम के तेवर की दुहाई देते रहे। सूर्य ढलने के बाद बाजारों में लोगों की चहल-पहल शुरू हुई।