धांवा में मिले प्राचीन अवशेष। स्रोत- ग्रामीण
गाजीपुर। मनिहारी ब्लॉक का धांवा गांव इन दिनों अपने भीतर छिपे इतिहास को लेकर चर्चा में है। गांव में लगातार मिल रहे प्राचीन अवशेषों ने अब विशेषज्ञों का ध्यान खींच लिया है। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग की टीम जल्द ही यहां पहुंचकर वैज्ञानिक तरीके से अध्ययन करेगी।
विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विराग सोनटके के मुताबिक, गांव से मिले अवशेषों के चित्रों के अध्ययन में यहां प्राचीन बसावट के संकेत मिले हैं। मिट्टी के ऊंचे-ऊंचे टीले, तालाब के बीच स्थित टापू जैसे ढांचे और खेतों से निकलने वाले पुरावशेष इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को मजबूत करते हैं।
गांव के लोगों के लिए ये अवशेष कोई नई बात नहीं हैं, लेकिन अब तक यह सिर्फ लोककथाओं और अनुभवों तक ही सीमित थे। समाजसेवी सिद्धार्थ राय बताते हैं कि खेतों में खुदाई के दौरान चमकदार पत्थर और पुराने बर्तन मिलना यहां आम बात है। कई बार कुओं की खुदाई में भी प्राचीन वस्तुएं निकल चुकी हैं। कुछ लोग इसे राजा मांधाता के समय से जोड़ते हैं, जबकि कुछ इसे उससे भी अधिक प्राचीन मानते हैं। अब बीएचयू की टीम के आगमन से इन कयासों को ठोस आधार मिलने की उम्मीद जगी है। यदि अध्ययन में यहां किसी प्राचीन सभ्यता या बसावट के प्रमाण मिलते हैं, तो धांवा गांव न सिर्फ जिले बल्कि प्रदेश के मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल के रूप में उभर सकता है।