गाजीपुर। गंगा किनारे रहने वाले अनगिनत भूमिहीन किसान सिर्फ अपनी मेहनत के बल पर सब्जियों की खेती से रोजाना हजार रुपये तक कमा रहे हैं।
लहुरी काशी के नाम से प्रसिद्ध गाजीपुर से होकर गुजरी जीवनदायिनी गंगा के किनारे सैदपुर से लेकर बिहार के बक्सर तक खीरा, ककड़ी, तरबूज आदि की जमकर खेती हो रही है। इस कार्य में अनगिनत भूमिहीन किसान भी मालामाल हो रहे हैं।
बानगी के तौर पर ददरी घाट को ही ले सकते हैं। यहां एक ओर गंगा की शांत लहरें बहती हैं तो दूसरी ओर जीवन की जद्दोजहद में डूबे किसान रेत के टापू पर नई उम्मीद बोते नजर आते हैं। यहां ऐसे तमाम किसान हैं, जिनके पास अपनी जमीन नहीं है लेकिन हौसला बेहिसाब है। गर्मियों की तपती धूप में ये गंगा की रेत पर खीरा, ककड़ी, तरबूज उगा रहे हैं।
रोजाना भोर में ककड़ी, सब्जी आदि को तोड़ते हैं और नावों से घाट तक लाते हैं। यह नजारा रोजाना भोर में चार से छह बजे तक देखा जा सकता है।
महिलाएं, बुजुर्ग, बच्चे अपने परिवार के साथ सिर पर टोकरी उठाए घाट की सीढ़ियां चढ़ते नजर आते हैं। संकट मोचन मंदिर के पीछे अस्थायी मंडी सजती है, जहां शहर के व्यापारी पहुंचते हैं और थोक में माल खरीदकर ले जाते हैं। अप्रैल से जून तक व्यापार होता है।