अपर सत्र न्यायाधीश फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम की अदालत ने करंडा थाना क्षेत्र में छह वर्ष पूर्व हुए हत्या के मामले में शुक्रवार को अभियुक्त को दोषी पाते हुए उसे आजीवन कारावास और दस हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। जुर्माने का भुगतान न करने पर एक वर्ष के अतिरिक्त कारावास का आदेश अदालत ने दिया है।
इलाके के करंडा थाना क्षेत्र के सबुआ निवासी लालचंद्र राम पुत्र सुदेश्वर ने अपनी पुत्री रीता की शादी आठ जून 2008 को नंदगंज थाना क्षेत्र के बड़हरा निवासी उमेश पुत्र सिरताज के साथ किया था। विवाह के बाद से ही रीता का पति दहेज में दस हजार रुपए की मांग करता रहा और इसको लेकर उसे प्रताड़ित करता रहा। 4 जून वर्ष 2010 की रात करीब 11 बजे लालचंद्र ने ससुराल में अपनी पत्नी रीता की गला दबाबर हत्या कर दी और उसका शव हीरा कुशवाहा के खेत में फेंक दिया।
सुबह रीता शव मिलने पर उसके पिता ने थाना करंडा में अपने दामाद के खिलाफ तहरीर दी। तहरीर के अधार पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 304 बी, 498 ए, 201 और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के तहत रिर्पोट दर्ज किया। ट्रायल के दौरान अदालत में सहायक शासकीय अधिवक्ता राजेंद्र सिंह यादव ने अभियोजन पक्ष की ओर से 9 गवाह पेश किए। अभियोजन पक्ष और बचाव पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने अभियुक्त उमेश को धारा 302 के तहत दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।