गाजीपुर। असंतुलित आहार, अत्यधिक दर्द निवारक दवाओं के सेवन, मधुमेह और उच्चरक्तचाप के चलते किडनी के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। स्थिति यह है कि डायलिसिस के लिए हर महीने 10 नये मरीज पहुंच रहे हैं। चौंकाने वाली बात ये है कि इस बीमारी की चपेट में व्यस्क ही नहीं किशोर भी अब आने लगे है। बीते छह माह में 60 नए मरीज डायलिसिस के लिए यूनिट में आए हैं, जो जनपद के ही हैं। इनमें तीन मरीज ऐसे हैं जिनकी उम्र 15 वर्ष के आसपास है। 15 से 25 आयु वर्ग के आठ मरीजों का डायलिसिस होता है। हालांकि 70 वर्ष के मरीजों का डायलिसिस किया जा रहा है। यूनिट में उपलब्ध 15 बेड पर प्रत्येक दिन 45 मरीजों का डायलिसिस होता है। मेडिकल कॉलेज के 200 बेड पुरुष अस्पताल के सबसे ऊपरी तल पर वर्ष 2022 में डायलिसिस यूनिट स्थापित हुआ था। यूनिट के मैनेजर रजनीकांत ने बताया कि तीन वर्ष में डायलिसिस के लिए 360 मरीजों को पंजीकृत किया गया। वर्तमान समय में 110 मरीज हैं, जबकि करीब 250 किडनी मरीजों की या तो मौत हो चुकी है या फिर डायलिसिस के लिए अन्य प्रांतों में जा चुके हैं। हालांकि बेड की संख्या बढ़ने से वेटिंग लिस्ट समाप्त हो चुकी है। सीएमएस डाॅ. राजेश सिंह ने बताया कि किडनी के मरीजों की बढ़ती संख्या का मुख्य कारण मधुमेह (डायबिटीज) और उच्च रक्तचाप है। यहीं नहीं मोटापा, असंतुलित आहार, धूम्रपान, अत्यधिक दर्द निवारक दवाओं का सेवन और पर्याप्त पानी न पीने जैसी जीवनशैली से जुड़ी आदतें भी जिम्मेदार है। कहा कि शहरीकरण और बदलती जीवनशैली, जिसमें बैठे रहने वाले काम और प्रोसेस्ड फूड का सेवन शामिल है।
डायलिसिस के लिए पहले किडनी मरीजों को वाराणसी एवं अन्य प्रांत जाना पड़ता था। तीन वर्ष से मेडिकल कॉलेज में मरीजों को इस सुविधा का लाभ मिल रहा है। अब तो गुर्दा रोग विशेषज्ञ के चिकित्सक की ओपीडी भी शुरू हो गई है। - प्रो.आनंद मिश्रा, प्राचार्य, महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज, गाजीपुर।