दीवाली पर नए धान का चूड़ा, लाई और लावा चढ़ाने की परंपरा है। लेकिन जनपद में बाढ़ और बारिश से धान की फसल चौपट होने के बाद इस बार दिवाली पर धान की नयी फसल से चूड़ा और लाई घर नहीं आएगा। हर साल दीपावली से पहले तैयार होने वाली धान की फसल को लेकर इस बार किसान चिंतित हैं। कुछ हिस्सों में बची फसल भी अभी तैयार नहीं है। पांच फीसदी धान की फसल कटी जरूर है, लेकिन वह भी खलिहान में रखी हुई है।
लोगों के घरों में इस बार बड़ी मुश्किल से नये धान का चूड़ा और लाई आ पाएगा। उत्पादन कम होने से किसान अभी बेचने के मूड में नहीं हैं। किसानों का कहना है कि दिवाली बाद धान जब तैयार होगा, तो बाजार भाव देेेखा जाएगा।
दीवाली पर महालक्ष्मी और भगवान श्रीगणेश की पूजा होती है। इस दिन नये धान का चूड़ा, लाई और चावल भी चढ़ाने की परंपरा रही है। लोगों का मानना है कि नये धान के आने से घर में धन-धान्य से पूर्ण होता है। लेकिन इस बार ऐसा होता नहीं दिखाई दे रहा है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में जहां किसान आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, वहीं अन्य इलाकों में मूसलाधार बारिश से धान की फसल पर असर पड़ा है। सैकड़ों एकड़ धान की फसल अब भी बारिश और बाढ़ के पानी से घिरी है। बची हुई धान की फसल पानी सूखने के बाद ही काटी जा सकती है। वर्तमान में धान की फसल 95 प्रतिशत खेत में है। जबकि पांच फीसदी कटी भी है तो वह खलिहान में है। कहीं भी नये धान का चूड़ा, लाई नहीं आएगा।
जिला कृषि अधिकारी एके प्रजापति ने बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में धान की फसल कमजोर हुई है। जबकि अन्य क्षेत्र में धान की फसल अच्छी है। इस बार बाढ़ और बारिश से धान की फसल समय से नहीं कट पाई है। वर्तमान में धान की फसल की कटाई शुरू हो गई है।