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इमाम हुसैन के तीजे का जुलूस निकला

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शोहदा-ए-कर्बला की याद में होने वाले मजलिस-ओ-मातम का दौर अब भी चल रहा है। शहर के मुगलपुरा स्थित सलमा बीबी के इमामबाड़े से 12वीं मुहर्रम बृहस्पतिवार को नवासा-ए-रसूल इमाम हुसैन (अ.स) और कर्बला के 71 शहीदों की याद में मजलिस-ओ-मातम के बाद उठने वाला तीजे का जुलूस परंपरागत ढंग से निकाला गया।
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जूलूस से पूर्व शोहदा-ए-कर्बला की मजलिस को खेताब फरमाते हुए शिया जामा मस्जिद के इमाम-ए-जुमा मौलाना तनवीरुल हसन जैनबी ने कहा कि कर्बला में आले नबी पर जुल्म की इंतहा कर दी गई। यौमे आशूरह यानी दस मुहर्रम को पैगंबरे इस्लाम के नवासे इमाम आली मकाम हजरत इमाम हुसैन और बच्चों और साथियों को तीन दिन तक भूखा प्यासा रखते हुए शहीद कर दिया गया। खेमों में आग लगा दी गई। बावजूद इसके इमाम ने हक का साथ न छोड़ा। जुल्म का जवाब मजलूमियत से दिया। कुनबे की कुर्बानी कुबूल की लेकिन यजीद की बैयत कुबूल न की। बेटी सकीना के कानों की बालियां नोची गई। इनकी शहादत के बाद आबिद-ए-बीमार सहित औरतों और बच्चियों को एक ही रस्सी में बांध कर ले जाया गया। तकरीबन एक वर्ष इन्हें कैद रखा गया। इस दौरान कैदखाने के अंधेरे में सकीना का दम घुट गया। इमाम की बहन जैनब ने सब कुछ बर्दाश्त किया। बाद मजलिस जुलूस बरामद हुआ जिसमें कई अंजुमनों ने नौहाख्वानी एवं सीनाजनी की। जुलूस अपने परंपरागत रास्ते मुगलपुरा से होते हुए लकड़ी का टाल, पानी टंकी, नखास, खुदाईपुरा, बरबरहना होते हुए आगा साहब के इमामबाड़े में जाकर संपन्न हुआ जहां ताजिया दफन किया गया। इस दौरान सलमा बीबी, मो. अब्बास नकवी, हुसैन अब्बास नकवी आदि मौजूद थे। सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिकोण से पुलिस कर्मी मौजूद थे।
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