गाजीपुर। कहते हैं संसार में सब मोह माया है। यहां कोई अपना नहीं है। अकेले आए हो और अकेले जाओगे। कथाओं में कही जाने वाली ये बातें रविवार को कासिमाबाद निवासी गौरीशंकर गुप्ता की मौत से सच साबित हुईं।
उनके तीन बेटे-तीन बहुएं, दो बेटियां-दो दामाद, पत्नी, नाती, ससुराल और रिश्तेदार हैं लेकिन जीवन के आखिरी दिनों में सभी ने मुुंह फेर लिया।
पांच दिन पहले पत्नी ने यहां तक बोल दिया कि मर जाएं तो भी मत बताना, जिसकी जानकारी रविवार को उनकी मौत के बाद वृद्धाश्रम के लोगों को हुई तो वहां मौजूद 58 वृद्धजनों की आंखें भर आईं और उन्होंने उनका अंतिम संस्कार किया। गौरीशंकर गुप्ता (85) के तीन लड़के और दो लड़कियां हैं। सभी की शादी हो गई है और बच्चे भी हैं। बताते हैं कि बच्चे दिल्ली में परिवार के साथ रहते हैं। गौरीशंकर पहले गल्ला व्यापारी थे।
बताते हैं कि वह बकाया पैसा न मिलने से परेशान होकर व्यापार करना छोड़ दिए थे। वह जिन लोगों का अनाज खरीदकर बेचे थे, उन लोगों के पैसे नहीं दे पाए। इससे वे घर पर पैसे मांगने आते थे। बदनामी की वजह से बेटे और बहुओं ने उन्हें घर से निकाल दिया था। आठ साल पहले वह ससुराल जंगीपुर आ गए लेकिन यहां भी उनका भरण पोषण नहीं हो पाया।
इसी बीच तीसरे व्यक्ति के माध्यम से वह 2019 में वृद्धाश्रम पहुंचे और यहीं दिन-रात गुजारने लगे। पिछले पांच महीनों से बिस्तर पर पड़ गए थे। उन्हें लकवा हो गया था। उनकी सेवा कर्मचारी करतीं थीं। इसी बीच 25 मई को उनकी मौत हो गई।
ससुराल में सूचना पर केवल एक साला आया। उसने बताया कि उनकी पत्नी पांच दिन पहले मायके गई थी और कह गई थी, ‘अगर वे मर भी जाएं तो भी हमें मत बताना।’ इस बीच वृद्धाश्रम में रहने वाली महिलाओं और वहां की संरक्षक ज्योत्सना सिंह ने उन्हें कंधा दिया।