मुस्लिम समुदाय ने बुधवार को मातम के पर्व मोहर्रम पर ताजिया मिलान किया। इस मौके पर इमाम हुसैन और उनके घरवालों की शहादत की याद में देर शाम शहर में मातमी जुलूस निकाला गया। जुलूस में हजारों लोग शामिल रहे। मातम में युवा और बुजुर्गों ने अचंभित करने वाले कला का प्रदर्शन किया। जिसमें खुद को घायल कर इमाम हुसैन की यादें ताजी कर रहे थे। मोहर्रम को लेकर कई दिनों से मातम, नौहाख्वानी का दौर जारी था। बुधवार को शहर सहित ग्रामीण इलाके के विभिन्न हिस्सों से ताजिया उठने का जो क्रम शुरू हुआ, वह भोर तक कर्बला में दफनाने तक चलता रहा। नगर के विशेश्वरगंज स्थित इमामबाड़े के पास जाम से लोग परेशान रहे।
शहर के मियापुरा, नखास, रुईमंडी, बरबरहना, गोराबाजार, शेखपुरा, एमएच इंटर कालेज, घाट स्टेशन, रजदेपुर, बबेड़ी, बंशीबाजार, बक्सूपुर आदि क्षेत्रों के ताजिएदार जुलूस के साथ नगर के विभिन्न क्षेत्रों में मामत मनाते रहे। उनके शरीर पर चोट के निशान साफ दिख रहे थे। तलवारबाजी का भी प्रदर्शन किया गया। कर्बला के शहीद इमाम हुसैन के नाम पर मातम मनाते हुए ताजिए का जुलूस उठाया गया।
गोराबाजार में अगड़ी और पिछड़ी अखाड़ा के ताजियों की मिलनी हुई। शाम को कई जगह और देर रात रजदेपुर में मिलनी का कार्यक्रम हुआ। गोराबाजार में ताजिएदारों के लिए कुछ समाजसेवियों ने पानी का स्टाल लगवाया था। ताजिया कमेटी के लोग जुलूस को व्यवस्थित ढंग से संचालित करने में जुटे रहे। पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे। नागरिकों के आपसी सहयोग के कारण हर जुलूस में सद्भाव की स्थिति बनी रही। बड़ी संख्या में ताजिएदारों के पहुंचने से बुधवार की शाम से लेकर देर रात तक विशेश्वरगंज स्थित इमामबाड़े के पास जाम की समस्या उत्पन्न हो गई थी। मोहर्रम पर रणकौशल और जंजीरी मातम का प्रदर्शन देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ी। मामती जुलूस जिस रास्ते से होकर गुजर रहा था, वहां प्रदर्शन का नजारा देख लोग अचंभित हो रहे थे।