गंगा कटान से सेमरा और शिवराय का पुरा का बहुत बड़ा भूभाग एवं कृषि योग्य भूमि गंगा कटान में जाने के बाद शासन द्वारा गांव को बचाने के लिये ठोकर का निर्माण कराया गया। लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के चलते ठोकर बनाने का काम आज तक पूरा नहीं हो सका है। ऐसे में अष्ट शहीदों का गांव शेरपुर में भी गंगा कटान का खतरा पैदा हो गया।
सेमरा से शेरपुर के बीच हो रहे गंगा कटान से बचाव के लिए शासन की ओर से दो परियोजना तैयार कर करीब 21 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत किया गया है। इससे मौजा तिरपनवा से पूरब 800 मीटर कटर निर्माण और शेरपुर श्मशान घाट के पास 600 मीटर तक बोल्डर पिचिंग का कार्य होना है। विभाग की ओर से शेरपुर श्मशान घाट के पास पोकलेन मशीन लगाकर मिट्टी स्लोपिग का कार्य कराया जा रहा है। बीते बरसात के दौरान गंगा के जलस्तर में बढ़ाव के दौरान शेरपुर के मौजा तिरपनवा से श्मशान घाट के बीच जबरदस्त कटान हुई। इससे शिवमंदिर सहित सैकड़ों बीघा कृषि भूमि गंगा में समाहित हो गई। कटान से गांव पर खतरा मंड़राता देख ग्रामीणों ने तिरंगा यात्रा निकालकर और अन्य सत्याग्रह आंदोलन कर शासन प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया। गांव के प्रभावशाली लोगों के प्रयास से शासन की ओर से 21 करोड़ की योजना स्वीकृत की गई। श्मशान घाट के पास बोल्डर पिचिंग कार्य कराने के लिए गंगा तट पर भूमि पूजन कराकर कार्य शुरू हुई, लेकिन काम की गति काफी धीमी एवं मानक के अनुरूप न होने के कारण बरसात से पूर्व इस के बह जाने का खतरा पैदा हो गया है। गौसपुर में भी गंगा कटान से बचाव के लिए थोड़ी दूर तक ठोकर बनाकर छोड़ दिया गया है। इसी प्रकार सेमरा में साधू के डेरा से पूरब तीन सौ मीटर बन रहा ठोकर भी निर्माण शुरू होने से तीन साल बाद भी पूरा नहीं हो पाया है। गांव के लोगों का कहना है कि अधिकारी पूरे साल सोये रहते है और मई के मध्य मे काम शुरु करते है और बरसात के बाद जून में गंगा में पानी भर जाने पर काम बंद हो जाता है। गंगा का कटान अधिकारियों और ठेकेदारों के लिए अवैध आमदनी का बहुत बड़ा श्रोत बन गया।