क्षेत्र के धरम्मरपुर कटरिया गांव में बुधवार की दोपहर झोपड़ी में आग लगने की घटना में गंभीर रूप से झुलसी मां-बेटी की मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से झुलसे पुत्र का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है। पुलिस ने शवों को कब्जे में
ले लिया। जिला अस्पताल पहुंचीं सदर एसडीएम और तहसीलदार ने घटना के संबंध में जानकारी ली।
धरम्मरपुर कटरिया निवासी सोबराती ठेला चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण करता है। रोज की तरह सुबह वह ठेला
लेकर रोटी की जुगाड़ में घर से निकल गया। दोपहर में सोबराती की पत्नी रेशमा (40), बेटी नूरजहां (1) और पुत्र शाहरुख (12) के साथ झोपड़ी में सो रही थी। इसी दौरान दोपहर करीब 12 बजे शार्ट सर्किट से झोपड़ी में आग लग गई। जब तक
रेशमा बच्चों को लेकर बाहर निकलने की सोचती, तब तक आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। ऊंची लपटों के साथ झोपड़ी जलने लगी। यह देख बाहर खेल रही बच्ची शबाना (8) शोर मचाने लगी। उसकी आवाज सुनकर गांव के लोग
दौड़कर मौके पर पहुंचे और घंटों मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। जब तक लोगों ने आग को बुझाया, तब तक रेशमा और उसके दोनों बच्चे गंभीर रूप से झुलस चुके थे। ग्रामीण मां और बच्चों को जिला अस्पताल लाए, जहां उपचार
के दौरान के रेशमा और उसकी पुत्री नूरजहां की मौत हो गई, जबकि पुत्र शाहरुख को भर्ती कराया गया। जानकारी होते ही एसडीएम सदर नेहा प्रकाश, तहसीलदार बृजेश वर्मा और लेखपाल जिला अस्पताल पहुंचे। अधिकारियों ने घटना की
जानकारी ली। इस संबंध में एसडीएम नेहा प्रकाश ने बताया कि घटना की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। मृतकों के परिवार वालों को शासन से मुआवजा दिलवाया जाएगा। थानाध्यक्ष शरदचंद्र त्रिपाठी ने बताया कि शार्ट सर्किट से आग
लगने की घटना हुई है। शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
भाग्यशाली थे शबाना और सलमान
आग की घटना से मां और मासूम बेटी की मौत की जानकारी होते ही गांववासियों में शोक की लहर दौड़ गई। लोगों की
घटनास्थल पर भीड़ एकत्र हो गई। घटना को लेकर हर कोई दुखी था। लोगों ने संवेदना जताते हुए कहा कि ठेला खींचकर परिवार की गाड़ी चलाने वाले गरीब सोबराती को ऊपर वाले ने किस बात की इतनी बड़ी सजा दे दी। लोगों की चर्चाओं में
यह बात प्रमुखता से शामिल थी कि शबाना (8) और सलमान (5) भाग्यशाली थे, जो घटना के समय झोपड़ी के बाहर खेल रहे थे, वरना ये भी इस दुर्घटना के शिकार हो जाते। मां और बहन की मौत से दुखी दोनों बच्चे गुमसुम बैठे थे।
इनको देख खासकर महिलाओं की आंखें नम हो गईं। उनका कहना था कि मां की मौत के बाद अब इन बच्चों का पालन-पोषण कैसे होगा।