पिछले दिनों हुई बारिश से जिले में बर्बाद हुई दलहनी, तिलहनी के साथ गेहूं की फसल के एवज में मदद की आस संजोए किसानों के हाथ निराशा ही लगी है। वजह कृषि विभाग की ओर से शासन को भेजी गई रिपोर्ट में 50 फीसदी से कम क्षति होनी दर्शायी गई है। इसके चलते जिले के प्रभावित किसानों को फसल बर्बादी का मुआवजा नहीं मिल पाएगा।
पिछले वर्ष सूखे की मार से जनपद के किसानों की कमर टूट गई थी। प्रदेश सरकार की ओर से जिलों को सूखाग्रस्त घोषित कर राहत देने की घोषणा की गई थी। वहीं प्रशासन की रिपोर्ट पर गाजीपुर जिले को इससे अलग रखा गया था। इसी प्रकार अब पिछले दिनों जिले में हुई बारिश से फसल बर्बाद होने के बाद भी हुआ है।
वजह प्रदेश सरकार की ओर से 50 फीसदी फसल बर्बाद होने पर मुआवजा देने की घोषणा की गई है। जिला कृषि विभाग द्वारा शासन को जो रिपोर्ट भेजी गई है, उसमें 44 फीसदी क्षति बताई गई है। इसमें गेहूं 21 तथा दलहन और तिलहन में 23 फीसदी ही नुकसान बताया गया है।
इसलिए मदद की आस जोह रहे किसानों को एक बार फिर झटका लग गया है। विभाग के मुताबिक इस बार जिले में पौने दो लाख हेक्टेयर भूमि में गेहूं की खेती की गई है। साथ ही दलहन की फसलों में मसूर 10 हजार हेक्टेयर, अरहर 5 हजार हेक्टेयर तथा अन्य फसलें 10 हजार हेक्टेयर भूमि पर खेती की गई है। जिला कृषि अधिकारी अशोक कुमार प्रजापति का कहना है कि पूरे जनपद में क्षति ग्रस्त फसलों का आंकड़ा 50 प्रतिशत से कम है, जिससे यहां के किसानों को फसलों का मुआवजा नहीं मिल पाएगा।