साहब अपनी मर्जी के मालिक हैं। जब जी चाहे आते हैं और जब मन करता है नहीं आते। अफसर अपनी कुर्सी पर नहीं बैठे तो मुलाजिम क्या उनसे कम हैं। वे भी नहीं आते दफ्तर। यह बात शनिवार को तब उजागर हुई जब
जिलाधिकारी डा. अशोक चंद्र के निर्देश पर दफ्तरों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में 18 से ज्यादा जिलास्तरीय अधिकारी और 200 कर्मचारी गैरहाजिर पाए गए।
मुख्य विकास अधिकारी अरविंद पांडेय ने सुबह कलेक्ट्रेट का निरीक्षण किया। वहां 18 कर्मचारी आए ही नहीं थे। उसके बाद वे चकबंदी कार्यालय पहुंचे, जहां आठ कर्मचारी अनुपस्थित थे। वन विभाग में सीडीओ ने सात कर्मचारियों को
गैरहाजिर किया। अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व आनंद कुमार शुक्ल ने विकास भवन के दफ्तरों, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, जिला पूर्ति विभाग, डिप्टी आरएमओ के कार्यालय का निरीक्षण किया। उन्होंने पाया कि15
जिलास्तरीय अधिकारी और 150 कर्मचारी अपने दफ्तर आए ही नहीं हैं। मुख्य राजस्व अधिकारी विद्याशंकर सिंह ने उप निदेशक कृषि, लोक निर्माण विभाग का निरीक्षण किया जहां आठ कर्मचारी गैरहाजिर थे।
जमानिया में उपजिलाधिकारी धीरेंद्र प्रताप प्राथमिकी स्वास्थ्य केंद्र देवैथा में गाय बंधी देख कर दंग रह गए। अस्पताल में ताला बंद था। पता चला कि डाक्टर साहब केवल सोमवार को आते हैं। उसी दिन कर्मचारी भी दिखते हैं। वे पूर्व
माध्यमिक विद्यालय करमहरी में पहुंचे तो वहां भी ताला लटक रहा था। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र अभईपुर डाक्टर धनंजय आनंद व दो कर्मचारी, सीएचसी बरूईन में प्रभारी चिकित्सक डॉ. आनंद कुमार, डॉ. संजय कुमार. पीएचसी
जमानिया में डा एस के सिंह, डॉ मनीषा सिंह सहित पांच स्वास्थ्यकर्मी गैरहाजिर थे। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र दिलदारनगर डॉ. काजिम अहमद, डॉ. सावित्री वर्मा समेत चार कर्मचारी अनुपस्थित रहे। सामुदायिक स्वास्थ केन्द्र रेवतीपुर में एक डाक्टर व एक वार्ड ब्याय अनुपस्थित मिले।