महंगाई के चलते इस बार होली का उत्साह फींका नजर आ रहा है। पिछले साल की तरह इस बार बाजारों में कोई खास रौनक नहीं दिखाई पड़ रही है। होली के मद्देनजर कपड़े और राशन के साथ-साथ अबीर और पिचकारी की दूकानें तो सजी हैं लेकिन भीड़ नहीं नजर आ रही है। देहात क्षेत्रों में भी यही हाल है। बेमौसम बारिश से फसल बर्बाद होने के कारण लगातार दूसरे वर्ष तबाह हुए किसानों बेहद परेशान हैं।
होली का त्योहार 23 मार्च को है लेकिन लोगों की भीड़ नहीं दिखाई दे रही है। इसको लेकर दूकानदारों भी चिंतित हैं। सबसे अधिक चिंता तो अबीर और पिचकारी के दूकानदारों को सता रही है। उन्हें डर है कि अगर अपेक्षित बिक्री नहीं हुई तो पूंजी डूब जाएगी। शहर के मिश्र बाजार, महुआबाग, लालदरवाजा सहित कई जगहों पर नमकीन, गुलाल-अबीर और पिचकारी की दूकानें सजी हुई हैं। इस संबंध में छोटे दूकानदारों का कहना है कि पहले लोगों एक सप्ताह पूर्व ही रंग-गुलाल, पिचकारी, नमकीन आदि की खरीदारी में लग जाते थे।
इस बार तो होली त्योहार में मात्र तीन दिन शेष बचे है लेकिन बाजार से लोगों की भीड़ पूरी तरह से गायब है। यही हाल कपड़ा और राशन की दूकानों का भी है। इन दूकानों पर भी पहले की तरह खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ नहीं लग रही है। इसको लेकर दूकान पूरी तरह से परेशान दिखाई दे रहे है। कई दूकानदारों का कहना है कि सरकारी कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने से लोग खरीदारी के लिए दूकानों की तरफ रूख नहीं कर रहे है।