जिले में होली पर्व के उत्साह को देखते हुए बाजार तो एक सप्ताह से सजकर तैयार है लेकिन महंगाई ने होली के उत्साह को पूरी तरह से फीका कर दिया है। साथ संविदा कर्मचारियों को वेतन नहीं मिलने से इनका रंग भी फीका पड़ा हुआ है। महीने के अंतिम चरण में होली का पर्व पड़ने और नगर पालिका तथा जल निगम आदि विभागों में संविदा कर्मचारियों का मानदेय नहीं मिलने से उनकी होली फीकी पड़ गई है। होली में खरीदारी को लेकर दिख रही उदासीनता के पीछे यह भी एक प्रमुख कारण है।
शहर सहित ग्रामीण इलाकों के बाजारों में एक सप्ताह पूर्व रंग बिरंगी टोपियों, रंग, गुलाल, पिचकारी, चिप्स आदि की दूकाने सज गई लेकिन बाजार पूरी तरह सुना रहा। होली पर्व के ठीक दो दिनों पूर्व बाजार में खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ दिखाई पड़ी। बाजार में लोग खरीदारी भी कर रहे हैं लेकिन पिछले साल की अपेक्षा खरीदारों की संख्या में कमी आ गई है। इस संबंध में आम लोगों और दूकानदारों का कहना है कि महंगाई की मार तो अपनी जगह पर है बाजार गुलजार नहीं होने का कारण महीने के बीच में होली पड़ना है।
इस बार होली महीने के अंतिम सप्ताह में पड़ जाने से भी लोगों में खरीदारी का उत्साह कम दिख रहा है। जिले के कई विभागों में संविदा पद पर तैनात कर्मचारियों का वेतन अभी तक नहीं मिला है। इसके चलते कर्मचारी कम ही मात्रा में समान खरीद कर किसी तरह होली के इस पर्व को निपटाना चाहते है। प्राइवेट एवं सरकारी कर्मचारी के वेतन में कोई बढ़ोत्तरी तो नहीं हुई लेकिन महंगाई की स्थिति जस की तस बनी हुई है। समानों का भाव आसमान पर होने से अधिकांश लोग खरीदारी करने पूरी तरह से परहेज कर रहे है।