जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा कि धर्म जीवन का आधार है। हिंदू धर्म प्रकृति, परमात्मा, प्राणी के बीच सेतु है। धर्म मानव को संतुलित, संयमित जीवन जीने के लिए पथ निर्दिष्ट करता है।
भारत की छवि धर्मगुरु की रही है। उन्होंने क्षेत्र के बिछुड़ननाथ महादेव मंदिर स्थित मुक्ति कुटी पर रविवार की देर शाम आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में यह बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म विश्व संस्कृति का प्राणाधार है। नदियों को माता एवं पशु-पक्षियों को सम्मानीय आदर देने वाले हिंदू धर्म की यह सहजता है कि विश्व के अन्य धर्मों के आदर के साथ ही पुष्पित-पल्लवित होने के लिए यह अनुकूल परिस्थितियों का संयोजनकर्ता है। कहा कि हाल के दिनों में हिंदू धर्म अपने ही लोगों के दिग्भ्रमित करने और छलावे का शिकार हुआ है। उन्होंने कहा कि साईं बाबा का प्रचार सुनियोजित है।
हिंदू धर्म के लोग अगर समय रहते नहीं चेतेंगे तो राष्ट्र और विश्व के साथ ही उनके अस्तित्व पर संकट खड़ा हो जाएगा। कहा शांति के अभाव में जीवन का कोई अस्तित्व नहीं है। इस मौके पर पंच अग्नि अखाड़ा के महंत रामकृष्णानंद, विश्व कल्याण आश्रम झारखंड के कैवल्यानंद ने विचार व्यक्त किया। इस दौरान मानस वक्ता नीलमणि शास्त्री, हिंगलाज सेना की राष्ट्रीय अध्यक्ष लक्ष्मीमणि शास्त्री, डा. बालकृष्ण पाठक, रामभद्र पाठक, अरुण सिंह, जीउतबंधन मिश्र, सतीश मिश्र, अजीत पाठक, राघवेंद्र पाठक, अविनाश बरनवाल आदि मौजूद थे।