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सिर्फ सात बाल रोग चिकित्सकों के भरोसे चल रहा जिला

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गाजीपुर। जिले भर के अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी से चिकित्सा सेवाएं पूरी तरह से लड़खड़ा गई है। सबसे दयनीय दशा बाल रोग को लेकर है। सीएचसी-पीएचसी पर चिकित्सक है ही नहीं, रोग विशेषज्ञ की कमी से रेफर होने वाले बच्चे रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। मानक के अनुसार प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र पर एक बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती अवश्य होनी चाहिए लेकिन जिले में ऐसा नहीं हो रहा है। जिले में 13 सीएचसी और पांच पीएचसी है जिसमें से मात्र सात पर बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती है।
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ठंड के मौसम में बुखार, सांस रोग और इंफेक्शन आदि रोग बच्चों में बढ़ जाता है। अस्पतालों पर पहुंचने वाले अधिकांश नवजात शिशुओं को चिकित्सक जिला अस्पताल रेफर कर देते हैं। इस दौरान कई शिशुओं की मौत समय से उपचार नहीं मिलने के कारण रास्ते में ही हो जाती है। नवजात शिशुओं का बाल रोग विशेषज्ञ ही बेहतर उपचार कर सकते हैं लेकिन जिले में दर्जनों सीएचसी, पीएचसी बनाए गए हैं जिस पर शिशुओं के लिए बाल रोग विशेषज्ञ तैनात नहीं किए गए हैं। जिस पर लोगों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लोगों को अपने शिशुओं के इलाज के लिए जिला अस्पताल आना पड़ता है। यहां महिला अस्पताल में एसएनसीयू है लेकिन वह भी रामभरोसे ही चल रहा है। सैदपुर और करंडा में एक-एक बाल रोग विशेषज्ञ थे लेकिन उन्हें सीएमओ आफिस अटैच कर दिया गया है। इसी प्रकार मुहम्मदाबाद में एक बाल रोग विशेषज्ञ, बारा में एक बाल विशेषज्ञ है। इधर नवाबगंज में एक बाल रोग विशेषज्ञ हैं जो तीन माह से बिना सूचना के गायब चल रहे हैं। मनिहारी, जखनिया आदि अस्पतालों पर एक बाल रोग विशेषज्ञ अवश्य होना चाहिए।
जिले में चिकित्सकों की कमी बनी हुई है। इसके चलते नौनिहालों तथा शिशुओं का इलाज काफी कठिन हो गया है। बार-बार शासन को पत्रक भेज कर चिकित्सकों की तैनाती की मांग की जा रही है लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है- डा. जीसी मौर्या, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
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