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पुल का आधा हिस्सा टूटा, लोगों के दर्द का गुबार फूटा

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गाजीपुर। बेसो नदी पर बना कठवामोड़ पुल का आधा हिस्सा तो टूट गया। लेकिन इससे उपजी मुसीबत लोगों का पीछा नहीं छोड़ रही। लोेग जान जोखिम में डालकर टूट रहे पुल के बगल से गुजर रहे। ऐसे में किसी भी हादसे का खतरा लगातार बना है। इसी रास्ते को बाइपास का रूप दिया गया है। वाहनों के गुजरने से उड़ रही धूल और लग रहे जाम से लोग परेशान हो रहे। पुराने एवं जर्जर स्थिति में पुल के पहुंचने की वजह से दो साल पहले ही इस पर भारी वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित कर दिय गया। इस बीच हल्के व दो पहिया वाहन इससे गुजरते रहे। जबकि भारी वाहनों को बलिया व रसड़ा के रास्ते बिहार और गोरखपुर आदि जिलों में भेजने के लिए पुल से सटे बाईपास का निर्माण कराया गया। अब शासन एवं जिला प्रशासन की पहल पर पुल को तोड़ने का काम जोर-शोर से चल रहा है। पहले चरण में पुल का आधा हिस्सा,पुल की रेलिंग आदि को ध्वस्त कर दिया गया है। विकल्प के रूप में पुल के नीचे बने बाईपास से आवागमन जारी है। लेकिन पुल टूटते वक्त समय-समय पर वाहनों का संचालन रोकना पड़ रहा है। इससे जाम की स्थिति उत्पन्न हो जा रही है। उधर पुल टूटने से बाइपास मार्ग पर उड़ रही धूल लोगों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। बेसो नदी पर बना कठवामोड़ पुल लगभग सात दशक पुराना था। पुल के पाए में दरार पड़ने तथा एक पाए के धंसने से जिला प्रशासन ने इस पर भारी वाहनों के आवागमन को रोक दिया था। दो साल से इस पर हल्के वाहन ही चल रहे थे। वैकल्पिक व्यवस्था के तहत नीचे से एक बाईपास सड़क बनाई जरूर गई। लेकिन इसकी मरम्मत व निर्माण सही ढंग से न कराए जाने के कारण इस पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। हिचकोले खाते लोग धूल से नहाकर इस रास्ते किसी तरह निकल पा रहे हैं।
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22 फरवरी को बलिया के सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त और मोहम्मदाबाद की विधायक अलका राय ने यहां बनने वाले नये पुल का शिलान्यास किया था। पुल को कार्यदायी संस्था मित्तल ब्रदर्स इंजीनियर्स एंड कांट्रेक्टर बना रहे हैं। देखा जाए तोकठवामोड़ से दो मार्ग निकलते हैं। एक भरौली की तरफ तथा दूसरा कासिमाबाद होते हुए रसड़ा की तरफ चला जाता है। ऐसे में इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर हमेशा वाहनों का दबाव बना रहता है। इस पुल सेप्त कासिमाबाद, रसड़ा, देवरिया, सलेमपुर, गोरखपुर के अलावा भरौली होते हुए बिहार के छपरा, हाजीपुर, पटना, माझी घाट आदि जाया जाता है। कार्यदायी संस्था की माने तो पुल के निर्माण को पूरा करने में करीब डेढ़ साल का वक्त लग जाएगा।
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