गाजीपुर। शहर के नई सब्जी मंडी स्थित एक सभाकक्ष में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित संवाद कार्यक्रम में व्यापारियों ने एमडीआर शुल्क पर बेबाकी से बात की। कहा कि यह शुल्क उनके मुनाफे को कम करेगा और उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालेगा।
उन्होंने सरकार से एमडीआर शुल्क पर पर पुनर्विचार कर इसे पूरी तरह वापस लेने की मांग की। सर्राफा व्यापार मंडल के महामंत्री संतोष कुमार वर्मा ने कहा कि चार्ज देने का आदेश व्यापारियों के हित में नहीं है। व्यापारियों पर पहले ही कई प्रकार के कर लगाए गए हैं।
यूपीआई पर दो हजार रुपये से अधिक के ट्रांजैक्शन एमडीआर शुल्क लगाए जाने से व्यापार की गति कम होगी। व्यापारी पहले से ही सीमित लाभ पर काम करते हैं। ऐसे में प्रत्येक डिजिटल लेन-देन पर शुल्क लगने से उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
उन्होंने इसे पूरी तरह वापस लेने की मांग की। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के जिलाध्यक्ष श्रीप्रकाश केशरी का कहना था कि यह फैसला व्यापारी और आम जनता दोनों के हित में नहीं है। इससे सबसे ज्यादा छोटे दुकानदार प्रभावित होंगे।
भारतीय आदर्श व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष आसिफ खान ने कहा कि एमडीआर चार्ज लागू होने की स्थिति में इसका पूरा भार व्यापारियों पर पड़ेगा। अतिरिक्त शुल्क लगाने के प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। गाजीपुर केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष नागमणि मिश्र ने कहा कि वर्तमान समय में यूपीआई से भुगतान आम बात हो गई है।
कपड़ा, दवा, शिक्षा, घरेलू सामान और रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी खरीदारी में दो हजार रुपये से अधिक का भुगतान सामान्य रूप से होता है। ऐसे में यूपीआई लेन-देन पर एमडीआर चार्ज लगाने से व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
होटल एसोसिएशन के उपाध्यक्ष प्रिंस सिंह का कहना है कि एमडीआर चार्ज लागू होने की स्थिति में इसका पूरा भार व्यापारियों पर पड़ेगा। इससे कारोबार की लागत बढ़ेगी और व्यापारियों की परेशानी बढ़ सकती है। यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित एमडीआर व्यवस्था पर व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखते हुए पुनर्विचार करने और इसे लागू नहीं करने की मांग की।