मरदह। मिनी सचिवालय के लगातार शो-पीस बने रहने के कारण ग्राम वासियों को ब्लॉक, तहसील और जिला मुख्यालय का चक्कर लगाना पड़ रहा है। इससे नाराज ग्रामीणों ने सोमवार को बकरी एवं गाय को पंचायत भवन पर बांधकर प्रदर्शन किया। उनका आरोप था कि ग्राम पंचायत सचिवालय बनवाने के पीछे सरकार का उद्देश्य था कि गांव के लोगों को आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, परिवार रजिस्टर की नकल आदि के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
प्रधान एवं सचिव सचिवालय में बैठकर ग्रामीणों की समस्याओं का निस्तारण करेंगे। इसके लिए पांच वर्ष पहले करीब 10 लाख की लागत से पंचायत सचिवालय बनवाया गया था। रायपुर बाघपुर गांव में प्रधान और सचिव, पंचायत सहायक मिनी सचिवालय में नहीं बैठते। मौजूदा समय में सचिवालय में न प्रधान बैठते हैं और न ही सचिव एवं पंचायत सहायक। सहायक विकास अधिकारी अजीत गुप्ता ने बताया कि सचिवालय बंद होने की जानकारी नहीं है। अगर इसे नहीं खोला जाता है तो जांच कर कार्रवाई की जाएगी।