फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नाव हादसे के बाद स्कूल नहीं गए बच्चे

विज्ञापन
विज्ञापन
सेवराई। भतौरा गांव में नाव डूबने के बाद जिला प्रशासन सतर्क और बचावकर्मी सजग हैं। मंगलवार को नाव हादसे के बाद अभिभावक अपने से बच्चों को दूर भेजने से डर रहे हैं। बाढ़ की दुश्वारियां झेल रहे बाढ़ पीड़ित किसी तरह का जोखिम लेने को तैयार नहीं है। बुधवार को गांव के सैकड़ों बच्चे पढ़ने स्कूल नहीं गए।
विज्ञापन

सेवराई तहसील के बाढ़ प्रभावित इलाकों में दर्जनों छोटी -बड़ी नावों को लगाया गया है। बाढ़ पीड़ितों की सुरक्षा और दिनचर्या को पटरी पर लाने के लिए जिला प्रशासन निरंतर प्रयास में जुटा है। कुछ दिन पहले आई भीषण बाढ़ के कारण लोग घर छोड़ने तक को मजबूर थे। दो दिन से गंगा के नरम तेवर ने लोगों को थोड़ी राहत दी है, लेकिन अब भी बाढ़ क्षेत्र में स्थिति जस की तस बनी हुई है। उधर बचाव कार्य में जुटे नाविक बच्चे, बूढ़े और महिलाओं को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं बाढ़ के पानी से घिरे गांवों में बाहर से आने वाले लोगों को उनके घर तक पहुंचाना और घर से बाहर जाने वालों को यहां से बाहर निकालने का कार्य निरंतर चल रहा है। नाविकों का कहना है कि हम मजबूर हैं। नाव की क्षमता के हिसाब से लोगों को बैठने को कहा जाता है, लेकिन ग्रामीण मानने को तैयार नहीं हैं। लोग जिद्द कर क्षमता से अधिक नाव में सवार हो जाते हैं। जिससे हादसे का खतरा बना रहता है। कुछ ऐसा ही मंगलवार को भतौरा गांव में भी हुआ। नाविक के मना करने के बाद भी लोग नहीं माने और क्षमता से अधिक लोग नाव में सवार हो गए थे। इस कारण नाव बाढ़ के पानी में बैठ गई थी। संयोग रहा कि कोई हताहत नहीं हुआ था।
घटना के बाद अब कोई भी अपने कलेजे के टुकड़े को घर से बाहर नहीं भेजना चाह रहा है। बच्चों को खोने के भय से भतौरा गांव के लोगों ने भी बुधवार को छात्र-छात्राओं को स्कूल जाने से मना कर दिया था। पिछले एक सप्ताह से गांवों में बाढ़ का पानी फैलने के साथ ही घरों तक पहुंच गया है। इससे पूरे क्षेत्र में चौतरफा तबाही का मंजर नजर आ रहा है। इस हालात में लोग बाढ़ की तबाही से कसक और सुबक रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें