इधर, पुलिस-प्रशासन की जांच में पता चला कि विनोद गुप्ता जेल में कार्डलेस सिम से बात कराने वाले पवन सिंह के संपर्क में आ गया, जो पवन सिंह के कहने पर बंदी बजरंगी से कहलवाकर उसके चचेरे भाई पंपी से सिम कार्ड अंदर मंगवाया। इसके खिलाफ चार मार्च को शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज किया गया। उसने कई खुलासे किए।
इसके अगले ही दिन डीएम आर्यका अखौरी, एसपी डॉ. ईरज राजा, एएससी सिटी ज्ञानेंद्र नाथ प्रसाद, सीआरओ आयुष चौधरी सहित जांच टीम जिला जेल गई। बंदियों-कैदियों और जिम्मेदारों से पूछताछ में सामने आया कि जेल में कई कैदियों को वीआईपी ट्रीटमेंट दिया जा रहा था। पैसे लेकर उन्हें खास सुविधाएं दी जा रही थीं और वे बिना रोक-टोक मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहे थे।