कलश पवित्रता और मंगल का प्रतीक
यज्ञाचार्य डॉ. पंडित धनंजय पांडेय ने कहा कि सनातन परंपरा में कलश को पवित्रता, मंगल और देवत्व का प्रतीक माना गया है। यज्ञ जैसे धार्मिक आयोजनों में आस्था और समर्पण के साथ सहभागिता करने से धार्मिक चेतना मजबूत होती है। ऐसे आयोजन लोगों को आध्यात्मिक परंपराओं से जोड़ने के साथ धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों का संदेश भी देते हैं।
चार नवंबर को पूर्णाहुति और महाभंडारा
श्री रुद्रांबिका धाम परिसर में महायज्ञ और श्रीराम कथा का आयोजन 26 अक्तूबर से चार नवंबर तक किया जाएगा। इस दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान होंगे और श्रीराम कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश दिया जाएगा। चार नवंबर को यज्ञ की पूर्णाहुति, प्रसाद वितरण और महाभंडारे के साथ कार्यक्रम का समापन होगा।