कासिमाबाद। गांवों में बने शौचालय लापरवाही के कारण प्रयोग की स्थिति में नहीं है । इसका उदाहरण कासिमाबाद विकासखंड के डिहंवा ग्राम पंचायत में दिखाई दे रहा है। चारों तरफ घास उगी है और दरवाजे टूटे हुए है। आज भी गांव की अधिकतर महिलाओं को शौच के लिए बाहर जाना पड़ता है। इस समय जिले के आला अधिकारी घूम कर शौचालयों की स्थलीय जांच कर रहे है। ग्रामीणों ने इधर के गांवों की तरफ भी उनका ध्यान आकृष्ट कराया है।
कासिमाबाद विकासखंड की डिहंवा ग्राम पंचायत में लगभग 219 शौचालय बनाने का लक्ष्य निर्धारित है । इस ग्राम पंचायत में अब तक लगभग 150 शौचालय पूर्ण किए गए हैं । जो शौचालय बनाए गए हैं उनमें अधिकांश की स्थिति रखरखाव और प्रयोग न करने के कारण काफी खराब दिखाई दे रही है । गांव के दुर्गा मंदिर एवं अंबेडकर पार्क पर सार्वजनिक रूप से बनाए गए शौचालय ग्राम प्रधान और सफाई कर्मियों की लापरवाही के कारण पूरी तरह से घास से पटा हुआ है। एक शौचालय का दरवाजा टूटा हुआ है। केंद्र और प्रदेश की सरकारें शौच मुक्त गांवों को करने के लिए रात दिन एक कर के लक्ष्य की पूर्ति में लगी हुई है । दूसरी तरफ ग्राम पंचायत के अधिकारियों एवं प्रधान की लापरवाही से अधिकांश गांव में स्थिति डिहंवा ग्राम जैसी ही है । गांव के ऋषिकेश उपाध्याय, पूजन गुप्ता, जितेंद्र कुमार, मुन्ना राजभर, श्याम नारायण राम, रामवृक्ष राम, सुवचन राम, राम नगीना राम आदि लोगों ने जिलाधिकारी का ध्यान आकृष्ट करा कर शौचालयों की स्थिति को ठीक कराने की मांग की है।