सेमरा और शिवराय का पुरा में शुरू हुआ कटान दूसरे दिन सोमवार को और तेज हो गया। गंगा के कटान से दर्जन भर मकान एक-एक कर नदी में विलीन हो गए। तट पर बसे लोग भयवश रातभर जागते रहे। कटान से पूरे गांव में पलायन शुरू हो गया है। कटान के कारण रिहायशी मकान और लगभग पांच बीघा कृषि योग्य भूमि भी नदी में समा गई। कटान की सूचना जिला प्रशासन को दे दी गई है, लेकिन प्रशासन स्तर से कटान रोकने का कोई भी उपाय नहीं किया गया है।
रविवार की शाम शुरू हुआ कटान शिवरायकापुरा में स्थित प्राथमिक पाठशाला एवं जच्चा बच्चा केंद्र के पास पहुंच गया है। स्कूल एवं जच्चा- बच्चा केंद्र में बनाए गए विस्थापित कैंप में रह रहे कटान पीड़ित भी अब उस केंद्र को खाली करके दूसरे स्थान पर सामान लेकर जाना शुरू कर दिए हैं। सेमरा से शेरपुर जाने वाली सड़क भी कटान की जद में आ गई। कटान तेज होने की वजह से बहुत से लोग अपने घरों के अंदर से सामान भी बाहर नहीं निकाल पाए थे कि सामान सहित मकान गंगा की धारा में समाहित हो गया। मातृ शिशु कल्याण केंद्र के पास सड़क का कुछ हिस्सा गंगा की धाराओं में विलिन हो गया। जिससे सड़क पर आवागमन ठप हो गया है।
सोमवार को रामबचन राय, शैलेष राय, सुदर्शन राय, अरविन्द राय, रमायन राय आदि के मकान गंगा में समा गएु। इसके अलावा अजीत राय, डॉ. योगेश गुप्ता, सीता राम पटेल, लोरिक यादव, जनार्दन यादव, रामेश्वर राय, रामअवध, बब्लू नाई, अर्जुन पटेल समेत लगभग दो दर्जन लोग अपने घरों को खाली करके सामान लेकर दूसरे चले गए। पूरे दिन घरों को खाली कर सामान ढ़ोने का क्रम जारी रहा। मकान के साथ-साथ लगभग पंाच बीघा कृषि भूमि भी कटान की भेंट चढ़ गई। गांव में मशहुर सैकड़ों साल पुराना विशाल इमली का पेड गंगा की धारा मे समा गया।