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एक सप्ताह में गंगा का जलस्तर एक मीटर तक बढ़ा

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गाजीपुर। जिले में गंगा नदी में उतार चढ़ाव का क्रम बना हुआ है। बुधवार की देर शाम नदी में हल्के बढ़ाव का क्रम शुरू हो गया। करीब एक सप्ताह में गंगा का जलस्तर करीब एक मीटर तक बढ़ा है। इसके चलते तटवर्ती गांवों के लोगों में भय फैल गया है। हालांकि अभी गंगा खतरे के निशान से काफी दूर है, लेकिन तटवर्ती लोगों में एक चिंता अभी से घर करने लगी है। गंगा में जब बढ़ाव होता है तो इसका असर अन्य सहायक नदियों पर भी पड़ने लगता है। कई नदियों का जलस्तर बढ़ने लगा है। जिले में सबसे बड़े भाग में गंगा गुजरती है। इसके तट पर करीब 700 से अधिक गांव है, जो बाढ़ की चपेट में आ जाते हैं। हालांकि अभी खतरा काफी दूर है लेकिन लगातार हो रही बढ़ोतरी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
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जिले में गंगा के अलावा गोमती नदी के बाढ़ से काफी तबाही होती है। इसके साथ ही टौंस, कर्मनाशा, बेसो, मंगई, गांगी, भैसहीं, उदंती आदि शामिल हैं। लगातार बरसात के बाद इन सभी के जलस्तर में हल्की, फुल्की तेजी दिखाई दे रही है। जिले के गंगा के खतरे की बिंदु 63.105 मीटर है जबकि बृहस्पतिवार की दोपहर तक गंगा का जल स्तर करीब 54.410 मीटर पहुंच गया। कठवा मोड़ संवाददाता के अनुसार, गंगा के जलस्तर में हल्का बढ़ाव देखा जा रहा है। इससे तटवर्ती इलाके के लोगों की धुकधुकी बढ़ने लगी है। हर साल बारिश और बाढ़ की वजह से नुकसान होता है। बेसों नदी में भी जलस्तर बढ़ रहा है। इससे तटवर्ती लोग अभी से सतर्क होने लगे हैं। उधर, मुहम्मदाबाद के सेमरा, बच्छलका पुरा, सुल्तानपुर, गौसपुर आदि तटवर्ती गांवों के लोग गंगा के पानी के बढ़ाव को महसूस करते हुए अपना बोरिया बिस्तर बांधने लगे हैं। उनका कहना है कि हर साल बरसात के समय में उनके साथ यहीं होता है। हालांकि इस बार गंगा किनारे लाखों की लागत से बोल्डर और पत्थर लगाकर ठोकर बनाया गया है लेकिन इसका कितना सार्थक परिणाम आएगा, यह आने वाला समय ही बताएगा। औड़िहार संवाददाता के अनुसार, बरसात के बाद गंगा और गोमती का पानी बढ़ने लगा है। पानी बढ़ने का अधिक नुकसान किसानों को हो रहा है। हालांकि अभी बाढ़ के संकेत तो नहीं है लेकिन तटवर्ती लोग सतर्कता बरतने लगे हैं। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, गंगा के जलस्तर में इस समय उतार-चढ़ाव बना रहता है। गंगा अभी खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही है।
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