प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निर्मल गंगा, अविरल गंगा के उद्देश्य को पंख लग गए हैं। जिले को स्वच्छ, सुंदर और विकसित करने की कड़ी में एक और कड़ी जुड़ गई है। रेल विकास निगम लिमिटेड की ओर से जिले के प्रमुख गंगा
घाटों के साथ ही शहर के कुछ प्रमुख स्थानों पर बायो टॉयलेट का निर्माण कराया जाएगा। इस संबंध में निगम के अधिकारियों ने सोमवार को संबंधित स्थानों का निरीक्षण कर सर्वे किया। अगर सब कुछ ठीक रहा तो बायो टॉयलेट के
निर्माण से जहां घाटों के आसपास रहने वाले लोगों को खुले में शौच करने से छुटकारा मिलेगा, वहीं गंगा को भी प्रदूषण से बचाया जा सकेगा।
केन्द्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद जिले के अच्छे दिन आ गए हैं। रेलवे की तरफ से जिले में कई विकास कार्यों के साथ ही स्टेशन पर यात्री सुविधाओं का विस्तार के कार्य कराए जाने हैं। शहर के अफीम फैक्ट्री के पास जोनल
प्रशिक्षण संस्थान और घाट स्टेशन के पास वातानुकूलित सब्जी भंडारण केन्द्र का निर्माण कराया जाएगा। यात्री सुविधाओं के विस्तार के क्रम में स्टेशन पर कुछ कार्य कराए जा रहे हैं जबकि कुछ आने वाले दिनों में कराए जाएंगे। विकास कार्यों
को आगे बढ़ाने के साथ ही स्वच्छता अभियान को पंख लगाने के लिए अब रेलवे जिले में बायो टॉयलेट का निर्माण कराने जा रहा है। इसके तहत रेल विकास निगम लिमिटेड के अधिकारियों ने सोमवार को शहर में बनने वाले बायो
टॉयलेट के निर्माण स्थल का निरीक्षण कर सर्वे किया। इस दौरान अधिकारियों ने शहर के नवापुरा घाट, कलक्टरघाट, श्मशानघाट, महिला डिग्री कालेज के पास तथा लाल दरवाजा के पास प्रस्तावित जगह को देखा। निगम की ओर से
जमानिया के बलुआघाट तथा सैदपुर स्थित घाट पर बायो टॉयलेट का निर्माण कराया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि टॉयलेट डीआरडीओ की तरफ से डिजाइन किया गया है। सर्वे के समय रेल विकास निगम लिमिटेड के मुख्य परियोजना
प्रबंधक विकास चन्द्र, निदेशक गीता मिश्र, एक्जीक्यूटिव डाइरेक्टर घोष राय, डीआरडीओ के तकनीकी विशेषज्ञ मुकेश सखूजा के अलावा नगर पालिकाध्यक्ष विनोद अग्रवाल, उम्मीद संस्था के निदेशक सिद्धार्थ राय, अभिषेक राय आदि मौजूद थे।
वर्ष 1996 में छोटी लाइन से बड़ी लाइन में तब्दील सिटी रेलवे स्टेशन सूबे का तीसरा रेलवे स्टेशन हैैं जहां वाई-फाई की सुविधा उपलब्ध हो गई है। गाजीपुर के अलावा प्रदेश की राजधान लखनऊ और वाराणसी स्थित स्टेशन पर यह आधुनिक सुविधा उपलब्ध है।
गंगा घाट समेत अन्य प्रमुख स्थानों पर बनने वाले बायो टॉयलेट की देखरेख विज्ञापन की आय से की जाएगी। बायो टॉयलेट के ऊपर कंपनियों के ग्लोसाइन बोर्ड लगाए जाएंगे। इसके विज्ञापन की आय से बायो टॉयलेट की देखरेख
भविष्य में की जाएगी। फिलहाल निर्माण के दो वर्ष तक डीआरडीओ खुद अपने स्तर से टॉयलेट चलाएगा। केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा के प्रयास से हो रहे इस कार्य के बारे में उनके प्रथम सहायक पीए सिद्धार्थ राय ने बताया कि
प्रत्येक टॉयलेट पर दो लोग तैनात किए जाऐंगे। उनके रहने के लिए एक रूम भी बनवाया जाएगा। सोलर लाइट भी लगेगी।