गाजीपुर। परिवहन विभाग का सरकारी काम दलालों के माध्यम से कराए जा रहे हैं। इसका नतीजा है कि आम आदमी परेशान हो महीनों चक्कर काट रहा है। वाहन के पंजीयन से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस बनाने तक का काम बाहरी दलाल ठेके पर चला रहे हैं। आम आदमी से तय शुल्क से पांच गुना अधिक राशि वसूल की जा रही है। पैसा देने में ना-नूकुर करने वालों को महीनों दौड़ाया जा रहा है। अधिकारी भी उनकी फाइलों में कोई न कोई कमी तलाश कर वापस लौटा दे रहे हैं या उन्हें बार-बार दौड़ा रहे हैं। मजबूरन लोगों को उनकी शरण लेनी पड़ रही है।
शहर से दस किमी दूर महाराजगंज में स्थित एआरटीओ विभाग में वाहन फिटनेेश, वाहन रजिस्ट्रेशन से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का काम कुछ चुनिंदा लोगों को दिया गया है। ऐसे एजेंट जिला सहायक संभागीय कार्यालय के सामने सुबह से शाम तक देखे जा सकते हैं। कोरोना काल में इनकी संख्या कुछ कम जरूर हो गई है। लेकिन अब भी सबकुछ इनके माध्यम से ही हो रहा है। कुछ एजेंट और दलाल कार्यालय के सामने अपनी छोटी-छोटी दुकान भी खोल रखे हैं। इनका असली काम विभागीय बाबुओं से सांठ-गांठ करना होता है। यह वाहन चालकों का ड्राइविंग लाइसेंस और फिटनेस बनवाने का काम करते हैं। यह धंधा ठेके के रूप में फलफूल रहा है। इसमें वाहन चालकों से दोगुना से तिगुना तक की वसूली की जा रही है। एजेंटों ने दो पहिया और चार पहिया वाहनों का अलग-अलग रेट निर्धारित कर रखा है। अधिकतम 1500 रुपये वाले लाइसेंस का पांच से छह हजार तक वसूला जा रहा है। विभागीय कार्यालय पर हर समय इन एजेंटों की भीड़ लगी रह रही है। पहनावे से यह अंदाज लगाना मुश्किल हो जा रहा है कि कौन वाहन चालक है और कौन एजेंट। यह अलग बात है कि हाथ में कई-कई आवेदनों का बंडल एकमात्र एजेंट होने का पहचान है, जिसे खिड़कियों से बिना किसी हिचक कर्मचारी स्वीकार कर ले रहे हैं। इन एजेंटों की भीड़ की वजह से विभागीय कार्यालय पर अराजकता का माहौल बन चुका है।
ग्राहकों को दे रहे हैं रेट के हिसाब से डेट
गाजीपुर। एक तरफ लर्निंग लाइसेंस के लिए प्रदेश शासन के निर्देश के अनुसार आवेदन 15 अगस्त तक बंद है। लेकिन कार्यालय के बाहर दुकानों में सक्रिय एजेंट लॉकडाउन में वाहन चेकिंग की समस्या से गर्दन बचाने के लिए हरहाल में लाइसेंस बनवाना चाह रहे हैं। एक तरफ विभाग से वापसी किया जा रहा है तो दूसरी ओर कार्यालय के बार दुकानों के एजेंट ऐसे वाहन चालकों से हजारों रुपये ऐंठ कर डेढ़ से दो महीने में लाइसेंस उपलब्ध करा देने का दावा कर रहे हैं। ग्राहक भी विभागीय खिड़की पर नहीं पहुंचकर सीधे इन एजेंटों के माध्यम से ड्राइविंग लाइसेंस और फिटनेस बनवाने में अपनी भलाई समझ रहा है।