कोहरे से वाहनों के पहिये ठहर गए हैं। यात्री गंतव्य तक समय से नहीं पहुंच पा रहे हैं। गाजीपुर से वाराणसी की यात्रा सड़क मार्ग से दो घंटे की जगह सवा तीन से चार घंटे में पूरी हो रही है।
वहीं सर्द हवाओं के साथ बढ़ी गलन से गरीबों के लिए मुसीबत खड़ी कर दी है। शहर में सार्वजनिक स्थानों पर अलाव की व्यवस्था तो की गई है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों अलाव के इंतजाम नहीं हुए हैं।
जिले में तीन दिनों से घना कोहरा हो रहा है। शाम होते ही कोहरे का प्रभाव शुरू हो रहा है जो दूसरे दिन सुबह दस बजे छाया रहता है। ऐसे में रात की यात्रा दुखदायी साबित होने लगी है। कोहरे के चलते ट्रेनों की लेटलतीफी से यात्रियों को घंटों ठंड में स्टेशनों पर समय बिताना पड़ रहा है।
पैसेंजर और एक्सप्रेस ट्रेनों की रफ्तार कम हो जाने से ट्रेन समय से गंतव्य तक नहीं पहुंच पा रही हैं। दूसरी तरफ सड़क मार्ग से यात्रा करना जोखिम भरा साबित होने लगा है।
रोडवेज की बसें गाजीपुर से वाराणसी ढाई से तीन घंटे में पहुंचती हैं लेकिन रात में यहां से वाराणसी जाने में तीन घंटे से अधिक समय लग जा रहा है। जाड़े में कोहरे ने दोपहर तक लोगों के कदम रोक दिए है।
शाम सात बजते-बजते कोहरे की स्थिति यह है हो रही है कि सामने हाथ तक नहीं नजर आ रहा है। इसके चलते शाम से ही बाजार में सन्नाटा पसर जा रहा है।
गहमर संवाददाता के मुताबिक क्षेत्र में सार्वजनिक स्थानों पर अभी अलाव की व्यवस्था नहीं की गई है। ठंड के चलते पर्यटन स्थल कामाख्या धाम में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की भीड़ में कमी आई है।
कोहरे और गलन के चलते जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है। पब्लिक स्कूलों में विंटर वेकेशन तो हो गया है लेकिन प्राथमिक विद्यालयों में अभी छुट्टी नहीं की गई है। इतना जरूर है कि स्कूल का टाइम दस से कर दिया गया है।
उधर, कोहरे से किसान भी चिंतित हैं। उनका कहना है कि अगर कोहरे की यही स्थिति लगातार कई दिनों तक बनी रही तो आलू, चना, मटर, अरहर की खेती पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।