जिले के एक तिहाई हिस्से में बाढ़ का कहर जमकर टूटा है। पिछले एक हफ्ते से गंगा का जलस्तर घट रहा है। नदी के तेजी से पीछे हटने के साथ ही कई परेशानियां भी एक साथ जन्म ले लीं हैं। बाढ़ पीड़ित एक साथ चौतरफा मार झेलने को मजबूर है। पीड़ितों के सामने दो वक्त की रोटी और शुद्ध पानी की समस्या अब भी बरकरार है। बाढ़ प्रभावित इलाके में नदी का पानी घटने के बाद अब संक्रामक रोगों ने जन्म ले लिया है, तो कहीं सब कुछ तबाह होने के बाद लोग रोजगार के लिए भटकते नजर आ रहे हैं। इन सारी समस्याओं का हल जिला प्रशासन के पास नहीं है। लोग अपनी जिंदगी को पटरी पर लाने के लिए खुद भाग-दौड़ में जुटे हैं।
गंगा की बाढ़ में सब कुछ गंवाकर कई दिनों से भूख-प्यास से तड़प रहे ग्रामीणों को अभी राहत नहीं मिली है। बाढ़ चौकियां, राहत शिविर शो पीस बने हुए हैं। यहां पीड़ितों के न खाने के लिए भोजन है और न पीने के लिए पानी। कई गांव और बस्तियों में बाढ़ का पानी हटने के बाद वहां गुजरना मुश्किल हो गया है। बावजूद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे ने वहां दवाओं का छिड़काव तक नहीं किया है। अभी भी कुछ गांव टापू बने हुए हैं। यहां से बाढ़ का पानी निकलना मुश्किल है। लोग नाव के जरिए सुरक्षित स्थान तक भेजे जा रहे हैं। एक हफ्ते पहले तक गंगा में आई बाढ़ से जनपद का एक तिहाई हिस्सा प्रभावित था। जबकि एक हफ्ते से गंगा का जलस्तर निरंतर घट रहा है। नदी के तेजी से पीछे हटने के साथ ही कई कई समस्याएं भी एक साथ जन्म ले लीं हैं। बाढ़ पीड़ितों को एक साथ चौतरफा मार झेलनी पड़ रही है।
बाढ़ ने ज्यादातर पीड़ितों के सिर से छत छीन ली है। तपती धूप और खुले आसमान के नीचे उन्हें दिन और रात गुजारनी पड़ रही है। बाढ़ पीड़ित पीने के पानी तक को तरस रहे हैं। इनके सामने निवाले की समस्या मुंह बाए खड़ी है। ज्यादातर बाढ़ पीड़ित अपने पशुओं के साथ रहने को मजबूर हैं। पशु चार तक कहीं नहीं मिल रहा है। बाढ़ की तबाही के बाद कई इलाकों में संक्रामक रोग भी फैल गया है। यह स्थिति शहर से लेकर गांव तक देखने को मिल रही है। चारो तरफ हालात बेकाबू है। अभी भी लोग तिल-तिल कर मरने को मजबूर हैं। बाढ़ पीड़ित एक साथ चौतरफा मार झेलने को मजबूर है। पीड़ितों के सामने दो वक्त की रोटी, पीने के पानी, पशुओं का चारा और संक्रामक बीमारी से छुटकारा मिलना मुख्य है। ऐसे में शासन और जिला प्रशासन की तरफ से कोई बेहतर सहयोग न मिलने से लोग रोजगार की तलाश में भटकते लगे हैं। क्येेंकि इन सारी समस्याओं का हल जिला प्रशासन के पास नहीं है। अपनी जिंदगी को पटरी पर लाने के लिए भाग-दौड़ शुरू है। देखना है बाढ़ पीड़ितों की जिंदगी कब तक पटरी पर आ जाती है।
वर्तमान समय में मुहम्मादाबाद के भांवरकोल, देवरिया, अवथहीं, शेरपुर, सेमरा, जोगा आदि गांव में बाढ़ पीड़ित परेशानी में हैं। जमानिया तहसील के मेदनीपुर, कालूपुर, ताड़ीघाट, पकड़ी, मेदनीपुर, देवरिया आदि की हालत गंभीर है। सदर तहसील के श्मशान घाट दलित बस्ती, मल्लाह बस्ती, बंधवा आदि हो गए। सैदपुर तहसील के पटना और खरवना गांव में अभी तक बाढ़ पीड़ितों को समस्या से जूझना पड़ रहा है।