गाजीपुर। करीब एक पखवारे से जिले में खतरे के निशान से उपर बह रही गंगा धीमी गति से घट जरूर रही हैं, लेकिन समस्याएं बरकरार हैं। गंगा में घटाव के साथ इनकी सहायक नदियों में उफान जारी है। ऐसे में करीब सौ गांवों पर संकट के बादल छाए हुए हैं। पिछले दो दिनों से गांगी और मगंई नदी भी कहर बरपा रही है। इनसे करीब दो दर्जन गांवों में जहां पानी प्रवेश कर गया है, वहीं कई गांव बाढ़ से घिरे हुए हैं। बहरियाबाद क्षेत्र में उदंती नदी भी काफी उफान पर है। बाजार समेत आस- पास के गांव तक में पानी पहुंच गया है। बेसो, कर्मनाशा आदि नदियों के जलस्तर में भी बढ़ोत्तरी जारी है। करीब 10 दिनों से गोमती नदी से भी घिरे गांवों की स्थिति जस की तस बनी हुई है। उधर, प्रशासन की ओर से राहत कार्य नहीं कराए जाने से लोगों में असंतोष व्याप्त है।
गंगा नदी में ठहराव के बाद सोमवार को धीमी गति से घटाव होने लगा है। दोपहर तीन बजे तक गंगा खतरे के निशान 63.105 से ऊपर 63.270 मीटर पर बह रही थी। एक पखवारा पहले सोमवार को ही भोर में गंगा ने खते के निशान को पार कर दिया था। इसके बाद से वह लगातार लाल निशान से ऊपर ही बनी हुई है। शहर के ददरी घाट, कलक्टर घाट, पोस्ता घाट आदि की सीढ़ियां अभी भी डूबी हुई है। कुर्था, बयेपुर, सोकनी, पुरैना, जैतपुरा आदि की स्थिति जस की तस है। औड़िहार संवाददाता के मुताबिक, सैदपुर एवं सादात क्षेत्र में कुल मिला कर गंगा, गोमती, गांगी, उदंती आदि नदियां बहती जो इस समय बाढ़ पर है। गांगी नदी के चलते डहरा खुर्द, निंदोपुर, उचौरी, भीमापार, बिझवल, निजामपुर, अमुवारा, सवना, लौलहा, मठिया, डहरा कला, भितरी, सराय हेतिम, महमूदपुर-हथिनी, देवकली आदि दर्जनों गांवों में जहां पानी घुस गया है। वहीं अधिकतर गिरे हुए हैं। गंगा के तटवर्ती गांवों रामपुर, मंझरिया, मांझा, नारी पचदेवरा, टोडरपुर, फुलवारी कला, दुबैथा, गायघाट, आराजीगंज, कोल्हुआ टोला, जौहरगंज, रामतवक्का, औड़िहार, पटना, गोपालपुर, गजाधरपुर, शादी-भादी आदि गांवों में पानी में कोई खास कमी नहीं आई है। गोमती नदी की बाढ़ की वजह से संकट में आए गोरखा, सूर्यभानचक, खरौना, सिधौना आदि गांवों तथा खलिहानों से पानी धीरे-धीरे निकल रहा है। देवकली संवाददाता के अनुसार, गांगी नदी में बरसात के चलते बाढ़ आने से परसनी, हीरानंदपुर, बड़िहारी, खोजनपुर, सियांवा, शिशुचक आदि गांव तक जहां पानी पहुंचने लगा है। वहीं, सैकड़ों एकड़ धान की फसलें जलमग्न हो गई है। चारों तरफ पानी ही पानी दिखाई दे रहा है। पानी के चलते एक दूसरे गांवों से संपर्क टूट गया है। प्रशासन की ओर से राहत कार्य नही कराए जाने से लोगों में असंतोष व्याप्त है।
जखनियां संवाददाता के अनुसार, तहसील क्षेत्र में मंगई एवं बेसो नदी में भारी उफान से जगह-जगह गांव में पानी घुस गया। पानी निकालने के लिए मुख्य मार्गों को भी काट देना पड़ा। क्षेत्र के ताल गांव में स्थिति सबसे बदतर है। जहां समूचे गांव में बरसात का पानी घुस गया है। लोग बेघर से हो गए। लगभग सैकड़ों लोगों को गांव के बाहर बने विनोद पांडेय इंटर कालेज में आश्रय लेना पड़ा। विद्यालय का भूतल पानी की चपेट में आ चुका है। ग्रामीणों को प्रथम तल पर ठहराया गया है। इसके साथ ही जखनिया क्षेत्र के अलीपुर मदरा बनवासी बस्ती में बाढ़ का पानी घुस गया है। जखनियां-सादात मार्ग पर उदंती नदी के पुल पर पानी ऊपर से बहने से आवागमन बाधित हो गया। वहीं, जखनियां रायपुर मार्ग पर जाही के पास मार्ग अवरुद्ध हो गया। जखनिया-बुढ़ानपुर के मध्य भुड़कुड़ा के पास सड़क को काट दिया गया। पूरे क्षेत्र में चारा, सब्जी, धान समेत अन्य फसलें डूब गई है। रेवतीपुर संवाददाता के अनुसार, गंगा के तटवर्ती गांवों डूहियां, कासिमपुर, बहलोलपुर, मेदिनीपुर, ताड़ीघाट, कालूपुर, बवाड़ा, युवराजपुर, पटकनिया, भगीरथपुर, गरुआ मकसूदपुर, इजरी, बैकुंठपुर, घाटमपुर, मलसा, पिपरा आदि में बाढ़ का पानी थोड़ा कम जरूर हुआ है लेकिन दुश्वारियां जस की तस बनी हुई हैं। भांवरकोल संवाददाता के अनुसार, गंगा में घटाव भले ही हो रहा है लेकिन अभी इस क्षेत्र में पानी की स्थिति जस की तस बनी हुई है। धर्मपुरा, फिरोजपुर गांवों का पानी कम नहीं हो रहा है। कठार, निकरोजपुर, आमघाट, रानीपुर, नकटीकोल आदि गांवों के बाहर पानी लगा हुआ है। इधर, मंगई नदी भी तेजी से उफान पर आई है। इसके चलते, मसौनी, लौवाडीह, सियाड़ी, गोड़उर, महेंद, देवरिया, सरदरपुर, नसरतपुर, जोगा मुसाहिब गांव के सिवान पानी से भर गए है। राजापुर, परसा, खेमपुर, सिलाइच आदि गांवों के करीब पानी पहुंच जाने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है। करीमुद्दीनपुर संवाददाता के अनुसार, मंगई नदी का बाढ़ इस क्षेत्र में भी तबाही मचाने की ओर अग्रसर हो रही है। करीमुद्दीनपुर, राजापुर, शेरमठ, उत्तमपुर, लट्ठूडीह, बाबूलाल का पुरा, कबीरपुर, सोनवानी, अल्लापुर आदि गांव की सैकड़ों बीघा फसल पानी में डूबी हुई है। बहरियाबाद संवाददाता के अनुसार, उदंती नदी के तेंवर में तीसरे दिन भी कोई खास कमी नहीं देखी गई। मनिहारी संवाददाता के अनुसार, बेसों नदी का पानी हरदासपुर काशी गांव में प्रवेश कर गया जिससे वहां के लोगों को पलायन करना पड़ रहा है।
टोंस और बेसो भी उफान पर
ताजपुर डेहमा संवाददाता के अनुसार, गंगा के दबाव के कारण टोंस नदी में भी बढ़ाव देखा गया। गोसलपुर, कुसहां, गड़ार आदि गांवों के किसानों की हजारों एकड़ जलमग्न फसलें नष्ट होने की कगार पर पहुंच गई है। धान, बाजरा, अरहर, हरी सब्जियां आदि बर्बाद हो गई हैं। पशुओं के चारे की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। कठवामोड़ क्षेत्र में बेसो नदी के बढ़ाव से तबाही मची हुई है। पानी दर्जनों गांव में प्रवेश कर गया है तथा अधिकतर गांव घिरे हुए है। सोमवार को भी फतेपुर अटवां, खालिसपुर बवाड़ा, नगवा नवापुरा, जल्लापुर, पकवाइनार, चौरही, चकफरीद आदि कुछ गांवों के आस पास जहां पानी जमा रहा वहां कुछ गांवों में पानी प्रवेश कर गया है। शहबाजकुली, गौसपुर, फिरोजपुर, चकफरीद गांवों में पानी चढ़ा हुआ है।
गंगा समेत जिले में बहती है नौ नदियां
गाजीपुर। जिले में गंगा समेत कुल नौ नदियां बहती है। इसमें सबसे बड़े भू-भाग में गंगा नदी जो जिले के सात में पांच तहसील क्षेत्रों से होकर गुजरती है। जनपद से होकर गुजरने वाली गंगा नदी के साथ ही अन्य सहायक नदियों में उफान के कारण विभिन्न इलाकों में तबाही का मंजर जारी है। सहायक नदियों में गोमती, टोंस, कर्मनाशा, बेसो, मंगई, गांगी, भैसहीं, उदंती आदि शामिल हैं। इस समय इन सभी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। इस समय गोमती, टोंस, बेसो, कर्मनाशा, मंगई आदि नदियां भी तबाही मचा रही है। तटवर्ती लोगों की सांसें टंग गई हैं। इन बाढ़ पीड़ितों को अभी तक कोई सहयोग नहीं मिला है।