गर्मी से भड़कती आग, बुझाने के उपाय नहीं
गर्मियों में आग भड़कती है। गाजीपुर अगलगी की दृष्टि से संवेदनशील जिला है। यहां आग की घटनाओं से हर साल बड़े पैमाने पर क्षति होती है। इसके बावजूद प्रशासन के पास आग पर काबू पाने के पर्याप्त बंदोबस्त नहीं हैं। न तो फायर सब स्टेशन नहीं खोले गए और न ही अग्निशमन विभाग के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। विभाग के पास मात्र पांच फायर टेंडर हैं, जिनके सहारे 60 से 70 किलोमीटर के क्षेत्रफल में आग पर काबू पाने का प्रयास करना पड़ता है।
गर्मी शुरू होने के साथ ही अगलगी की घटनाएं बढ़ गई हैं। बिजली के जर्जर तारों के टूटने से अक्सर खेत, खलिहान, मंड़ई में आग लगती रहती है। इससे भारी नुकसान होता है। अलग-अलग कारणों से जनवरी से मार्च के बीच 27 जगह आग लगी। विभागीय आंकड़ों के अनुसार आग की इन घटनाओं में 19 लाख 38 हजार तक क्षति हुई और चार पालतू जल गए। संसाधनों की कमी से जूझ रहा अग्निशमन विभाग इन घटनाओं को समय रहते काबू पाने की स्थिति में नहीं है। हालत यह है कि अग्निशमन विभाग के पास मौजूद पांच फायर ट्रेडर में से एक विंध्याचल मेले के लिए रवाना कर दिया गया है। इनमें ढाई हजार लीटर और 2700 लीटर के दो-दो और एक चार हजार लीटर क्षमता का है। अक्सर जहां इनको भेजा जाता है, वहां पानी की कमी पड़ ही जाती है। ऐसी स्थिति से निबटने के लिए कुओं और तालाबों से पानी लेने की जरुरत होते है। इसके लिए पांच पोर्टेबल पंप भी हैं। इन पंपों को ले जाने के लिए चार छोटी गाड़ियां हैं। मुहम्मदाबाद, जमानिया और सैदपुर में ढाई हजार लीटर की क्षमता वाले एक-एक फायर टेंडर उपलब्ध कराए गए हैं जबकि सदर तहसील में चार हजार और 2700 हजार लीटर की दो दमकल गाड़ियां मौजूद रहती हैं। जखनिया और कासिमाबाद में आग पर काबू पाने के लिए इतना भी इंतजाम नहीं है। जिला मुख्यालय से दोनों तहसीलों की दूरी अधिक होने से फायर ट्रेडर के पहुंचने तक सब कुछ जल चुका होता है।