मंगलवार को दिन साढ़े बारह बजे तक सब कुछ सामान्य था। लोग अपने-अपने कामों में व्यस्त थे। इसी बीच करीब 12:35 बजे भूकंप का पहला झटका लगा। एकबारगी तो लोग समझ नहीं पाए।
लेकिन जब घर डोलने लगे, खिड़कियों दरवाजे खटखटाने लगे, मेज पर रखी गिलास गिरने पर हर किसी को भूकंप का पता चला।
इसके बाद जो जहां था, वहीं से अपनी जान बचाने के लिए खुले आसमान के नीचे भागने लगा। भगदड़ के बीच देखते ही देखते घर, दूकान, आफिस पूरी तरह से खाली हो गए।
बाजारों में खुले आसमान के नीचे लोगोें की भीड़ जमा हो गई। हर कोई भूकंप की वजह से सहम रहा। अस्पतालों से मरीज और उनके तीमारदार भी बाहर भाग निकले।
वाहनों पर सवार होकर सड़कों पर दौड़ रहे लोग भीड़ को देख कर संशकित हो गए। जब उन्हें भूकंप का पता चला तो वह भी जहां-तहां वाहन खड़े कर रुक गए।
स्कूलों में पढ़ रहे छात्रों को भी भूकंप का झटका महसूस हुआ तो वह शोर मचाते हुए कक्षों से भागते हुए बाहर आ गए। डरे बच्चे दुबारा क्लास में जाने को तैयार नहीं थे।
धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होने लगी, लेकिन इसी बीच करीब 1:20 बजे फिर भूकंप का झटका आ गय झटका महसूस होने पर फिर लोग थर्रा उठे और दोबारा भागकर खुले आसमान के नीचे आ गए। हालांकि भूकंप के झटके से जिले में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ है।