गाजीपुर। प्री मानसून के दस्तक देने के बाद किसान खरीफ की खेती में जुट गए हैं। धान की नर्सरी डालने के बाद अब रोपाई की तैयारी चल रही है। बावजूद जनपद के अधिकांश साधन सहकारी समितियों पर खाद एवं बीज उपलब्ध नहीं है। इस कारण किसानों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। विभाग खाद और बीज के उपलब्ध होने का दावा कर रहा हैं।
जिले में कुल 166 साधन सहकारी समितियां हैं। इनमें से 154 सक्रिय सहकारी समितियां उर्वरक का व्यवसाय करती है। गेहूं के बाद खेत खाली होने पर किसान इस समय खरीफ की खेती में अरहर, ज्वार, बाजरा, मक्का के साथ ही धान की नर्सरी की बुवाई की तैयारी में जुट जाता है लेकिन इस बार समितियों पर डीएपी खाद न होने से किसान की यह तैयारी धरी रह गई है। खेत बनकर तैयार है लेकिन एनपीके और डीएपी न मिल पाने से बीज नहीं डाला जा रहा है। बरसात का मौसम शुरू होने वाला है। किसान धान की रोपाई के लिए बीज और उर्वरक के लिए समितियों का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन समितियों में उर्वरक का स्टाक न होने के कारण उन्हें मजबूर होकर प्राइवेट दुकानों से धान का बीज एवं डीएपी खाद लेनी पड़ रही है। जिले के बफर गोदाम में 2852 एमटी प्रिपोजिशनिंग का स्टाक है, जिसमें 2152 एमपी खरीफ अभियान के लिए एवं 700 एमटी रबी के लिए सुरक्षित रखा गया है। इस समय मौजूदा समय में जिले में 3503 एमटी डीएपी में 1503 एमटी खरीफ के लिए और दो हजार एमटी रबी के लिए है। इसके बावजूद साधन सहकारी समितियों पर उर्वरक न होने से किसान परेशान हैं। समितियों के सचिवों ने बताया कि समितियों की ऋण सीमा 31 मार्च 2020 को समाप्त हो गई है। लगभग तीन माह बीत जाने के बाद भी वर्ष 2020-21 के लिए जिला सहकारी बैंक द्वारा समितियों की उर्वरक ऋण सीमा स्वीकृत न किए जाने के कारण समितियों पर खाद नहीं पहुंच पा रही है। दुबिहां संवाददाता के मुताबिक, बाराचवर विकास खंड में तेरह सहकारी समितियां कार्यरत हैं। इन समितियों पर भी खाद की किल्लत है।
एआर कोऑपरेटिव अजय पालीवाल ने बताया कि सभी समितियों की कैश एंड कैरी की ऋण सीमा सहकारी बैंक द्वारा पास की जाती है। बैंक की प्रबंध समिति की आज बैठक में ऋण सीमा पास कर दी गई। समितियों की मांग के अनुरूप उन्हें जल्द ही उर्वरक उपलब्ध करा दिया जाएगा।