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नहरों में धूल उड़ने से किसान हुए परेशान

Mon, 16 May 2016 12:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,गाजीपुर
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शासन द्वारा किसानों  को निशुल्क सिंचाई की सुविधा देने की बात केवल छलावा साबित हो रही है। नहरें सूखी हुई हैं, उसमें महीनों से पानी नहीं छोड़ा गया। सब्जी सहित इस समय की जा रही खेती की सिंचाई नहीं हो पा रही। किसान विवश और चिंतित हैं। वहीं देवकली पंप कैनाल बाराचवर विकास खंड के गांव  के मध्य से होकर जाती है।  उसमें पानी नहीं छोडे़ जाने से क्षेत्र के किसानों को इसका कोई लाभ नहीं  मिल पा रहा है। यही स्थिति भावरकोल विकास खंड के दर्जनों गांव के सैकड़ों किसानों  की है।
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यहां खेतों की सिंचाई के लिए बीरपुर पंप कैनाल की स्थापना की गई।  लेकिन  विभागीय  अधिकारियों की उदासीनता के चलते पंप कैनाल की साफ-सफाई और  मरम्मत  के अभाव में जर्जर हो चुका है। हर साल मरम्मत व सफाई के नाम पर लाखों रुपये विभागीय अफसर गटक जाते है। इन पैसों  का  बंदरबांट होने के कारण आजतक मुख्य नहर सहित उससे जुडे़ आमी, बंशी,   टोडरपुर तथा तराव  माइनरों की सफाई कभी पूरी नहीं हुई।


 संबंधित विभाग की ओर से नहरों में घास-फुस साफ करके केवल औपचारिकता निभाई जाती है। बीरपुर के पास मुख्य नहर पर बनी पुलिया  और फाटक टूट गए हैं। जिससे  नहर का पानी किसी तरह बीरपुर के इर्द-गिर्द तक ही पहुंच पाता है। जबकि वंशी, टोडरपुर तथा तरांव सहित मुख्य नहर के किनारे दर्जनों गांव में सब्जी की खेती,  सूरजमुखी, प्याज की खेती तथा पशुओं के लिए बोए गए चारे की फसल सिंचाई के अभाव में  सूख रही है।
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नहर में पानी आने पर इन गांव के किसानों को जहां मुफ्त सिंचाई  सुविधा मिलती है, वहीं नहर में पानी न आने के कारण अपनी फसलों को जीवित रखने के  लिए किसानों को सिंचाई पर काफी धन खर्च हो रहा है। सिंचाई विभाग के अभियंता आरके पांडेय ने कहा कि नहर तो चलती है।


वैसे पानी और अधिक खेतों तक पहुंच  सके इसके लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। दुर्गापुर माइनर में पिछले तीन  दशक से पानी नहीं छोडे़ जाने से दर्जनों गांवों की खेती पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। 1980 के दशक में दुर्गापुर माइनर की खुदाई की गई थी। जिसमें  दरियापुर, औरैया भौदास, नदुला, मुबारकपुर मुतलवे, सागापाली, जयरामपुर  भंगवल, मिश्रौली आदि दर्जनो गांवों की काफी उपजाऊ कृषि भुमि खुदाई में चली गई  थी।
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