दिलदारनगर। इलाके के अमौरा कर्मनाशा घाट से मंगलवार की शाम नदी पार कर बहन के घर बिहार जा रहा किसान नदी की लहरों में समा गया। वाकया उस समय हुआ जब वह पैदल ही पानी के रास्ते नदी पार कर रहा था। घटना के बाद नदी तट पर मौजूद लोग शोर मचाने लगे। इस बीच घटना की सूचना तत्काल पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को दी गई। लेकिन पुलिस उदासीन बनी रही। घटना के 18 घंटे बाद मौके पर पुलिस कर्मी तथा राजस्व कर्मी पहुंचे। ग्रामीण इनकी लापरवाही पूर्ण कार्रवाई से काफी नाराज थे। उधर हादसे की सूचना मिलते ही परिजनों में मातम छा गया। सूचना पर पहुंचे परिजनों ने उनकी तलाश शुरू कर दी। लेकिन कहीं अता-पता नहीं चल सका। दूसरे दिन पूर्वांह्न 11 बजे मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थानीय गोताखोरों की मदद से किसान के शव की तलाश शुरू कर दी। लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका कहीं अता-पता नहीं चल सका।
यूपी-बिहार को जोड़ने वाली कर्मनाशा नदी में कुछ दिन पहले तक पानी काफी कम था। लोग घुटने भर पानी में घुसकर पैदल ही नदी पार कर बिहार चले जाते थे। जबकि लोगों को लाने और ले जाने के लिए वहां नाव भी चलती है। बिहार में अपनी बहन के घर जाने के लिए मंगलवार को सायंकाल जमानियां कोतवाली क्षेत्र लहुआर गांव निवासी अवधेश राय उर्फ शास्त्री (55) भी पहुंचे। इसके बाद वह किसी तरह पैदल ही अमौरा घाट पहुंचे थे। वहां नाव न होने की स्थिति में पैदल ही कर्मनाशा नदी पार करने का निर्णय ले नदी में प्रवेश कर गए। इसी बीच मध्य में एक बड़ा गड्ढा होने की वजह से वह गहरे पानी में फिसल कर चले गए और नदी की धारा में समा गए। वह बचने का काफी प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। इधर घाट पर मौजूद लोग शोर मचाने लगे। सूचना पर दूसरे दिन मौके पर पहुंची पुलिस स्थानीय गोताखोरों की मदद से तलाश में जुटी रही, लेकिन सफलता नहीं मिली। परिजन मौके पर पहुंचे और बिलखने लगे। पत्नी ज्ञानमाला राय का रोते-रोते हालत खराब हो गई है। घटना की जानकारी होने के बाद बहनोई राजदेव राय बड़े भाई अनिल राय तथा चाचा बृजेश कुमार राय भी घटना स्थल पर पहुंच गए। एकलौती बेटी पूजा राय भी पिता के डूबने की सूचना पर बिलख रही है। उधर दोपहर बाद दिलदारनगर थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार पांडेय एवं राजस्व कर्मी मौके पर पहुंचकर गोताखोरों को खोजबीन के लिए और सक्रिय किया।