गाजीपुर। विद्यालयों को अनुदानित की श्रेणी में लाने का फर्जी पत्र जारी हो गया है। इसकी जानकारी होने पर विभाग में हड़कंप मचा है।
जिला समाज कल्याण अधिकारी राम नगीना यादव के मुताबिक जालसाजों ने एक फर्जी पत्र प्रमुख सचिव समाज कल्याण लखनऊ के नाम से 16 मार्च की तिथि अंकित कर जारी कर दिया।
अंदेशा जाहिर किया जा रहा है कि निजी प्रबंधतंत्र द्वारा संचालित और समाज कल्याण विभाग की ओर से अनुदानित प्राथमिक विद्यालयों में अध्यापकों की नियुक्ति, नये विद्यालयों को अनुदान की श्रेणी में लाने के नाम पर धन उगाही/ठगी की जा रही है।
उच्चाधिकारियों की ओर से इस भ्रामक आदेश के बारे में एक दिन पहले ही सभी जिला समाज कल्याण अधिकारियों को बताया गया है। जिला समाज कल्याण ने बताया कि विभाग की ओर से नये विद्यालयों को अनुदान पर लाने और नये शिक्षकों के चयन/नियुक्ति का कोई भी शासनादेश/पत्र शासन अथवा निदेशालय स्तर से निर्गत नहीं किया गया है। कोई भी व्यक्ति किसी भी प्रकार के प्रलोभन में न आए। प्रकरण में नियमानुसार सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कराते हुए दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी।
अनुदानित विद्यालयों के चयन पर है रोक
पहले सरकारी विद्यालय न होने पर एक-डेढ़ किमी में संचालित विद्यालयों को अनुदानित विद्यालय की श्रेणी में ले लिया जाता था। मौजूदा समय में जनपद में भी ऐसे 43 विद्यालय संचालित हैं। हालांकि अब प्राथमिक विद्यालयों की संख्या अधिक हो गई है और समस्या का समाधान भी हो गया है। ऐसे में समाज कल्याण विभाग ने नये अनुदानित विद्यालयों के चयन पर रोक लगा दी है। वजह बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा प्रति 1-1.5 किमी पर विद्यालय स्थापित कर दिए गए हैं। जनपद में 2266 विद्यालय संचालित हैं।