छुकछुकिया विकास दो साल में एक्सप्रेस हुआ है। मनोज सिन्हा के रेल राजमंत्री बनने के बाद पटरियों पर ट्रेनें तो दौड़ने लगी ही हैं, सड़कों पर गति बढ़ने की आस जगी है। दो प्रमुख सड़कें राष्ट्रीय राजमार्ग में शुमार हो गई हैं। इससे पटरियों और सड़कों पर रफ्तार बढ़ेगी तो सब्जियां सड़ेंगी नहीं दिल्ली की मंडियों तक पहुंचेंगी और भाव पाएंगी। किसान खुशहाल होगा। केंद्र के साथ-साथ प्रदेश सरकार भी मेहरबान है। जिले में कासिमाबाद और सेवराईं तहसीलों की सौगात प्रशासनिक दक्षता बढ़ाएगी।
दो साल में 10 से ज्यादा रेलवे स्टेशन सजे और संवरे हैं। यात्री गाजीपुर सिटी स्टेशन के बजाय बनारस से ट्रेन पकड़ना चाहते थे लेकिन अब हालात बदल गए हैं। यह स्टेशन ऐसा संवर गया है कि उसे बी श्रेणी के स्टेशनों में स्वच्छता के मामले में अव्वल स्थान हासिल हुआ है। इस वाईफाई स्टेशन पर उच्च श्रेणी का यात्री प्रतीक्षालय बन रहा है। औड़िहार, सैदपुर, सादात, नायकडीह हाल्ट, जखनिया, दुल्लहपुर, नंदगंज, यूसुफपुर, जमानिया, दरौली, दिलदारनगर, भदौरा, गहमर एवं बारा हाल्ट की सूरत लगभग 33 करोड़ रुपये खर्च कर संवारी जा रही है। औंडिहार में यात्री प्रतीक्षालय बन चुका है और डेमू गाड़ियों के लिए कार्यशाला बनने वाली है। डेमू गाड़ियों के अलावा महामना एक्सप्रेस ने गाजीपुर को सीधे तौर पर दिल्ली के आनंद विहार से जोड़ दिया है।
गंगा के किनारे जब सब्जियां जब पैदा होती हैं तो इतनी अधिक कि स्थानीय बाजार में बेभाव बिकती हैं और बरबाद होती हैं। अब ऐसा नहीं होगा। गाजीपुर घाट स्टेशन के बाद वातानुकूलित सब्जी भंडारण केंद्र बन रहा है। अब यहां पैदा होने वाली तरकारी देश के किसी भी हिस्से में ले जाकर बेची जा सकेगी, जहां उसकी वाजिब कीमत मिले।
रेल का क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र
अफीम फैक्ट्री के पास क्षेत्रीय रेल प्रशिक्षण संस्थान का निर्माण जोरों पर है। इसको बनाने के लिए 14 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इतना ही नहीं जमानिया एवं गहमर स्टेशन पर यार्ड की रि-माडलिंग हो रही है। छपरा-गाजीपुर-वाराणसी रेलखंड का दोहरीकरण 609.04 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है।
ताड़ीघाट से मऊ को जोड़ने वाले रेल मार्ग को बनाने की स्वीकृति मिल चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों बलिया में इसकी घोषणा की थी। इस पर 1045 करोड़ रुपये खर्च होंगे। गंगा पर डबलडेकर पुल बनेगा, जिससे रेलगाड़ियां और ट्रकें दोनों गुजरेंगी। गंगापार से जिला मुख्यालय और मऊ करीब हो जाएंगे। सिटी रेलवे स्टेशन के पास 12 करोड़ 60 लाख रुपये से वाशिंग पिट बनेगा। इसके बाद ज्यादा ट्रेनों का संचालन गाजीपुर से संभव हो पाएगा।
ताड़ीघाट-बारा और सैदपुर से मरदह के बीच की सड़कों को अब राष्ट्रीय राजमार्ग का दर्जा हासिल हो गया है। दोनों सड़कों के बनने के बाद बिहार और गोरखपुर के बीच की दूरियां कम होंगी तो कई रेलवे क्रासिंग पर बनने वाले रेल ओवर ब्रिज और सबवे गति बढ़ा देंगे।
रौजा पर रेलवे ओवर ब्रिज बनने के बाद जाम की समस्या से निजात मिली। मिश्र बाजार की सब्जी मंडी इस पुल के नीचे लगने लगी और लोगों ने स्वेच्छा से मुख्य बाजार में अतिक्रमण हटाया गया। जाम से राहत मिली। शहर की सड़कें भी इस साल फर्राटा बन गई हैं। उधर, दूसरी ओर नगर के युवकों ने पार्कों से लेकर गंगा घाटों के सौंदर्यीकरण पर कार्य किया। इससे नगर की सूरत बदली बदली नजर आ रही है।