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Ghazipur News: आजादी के 79 वर्ष बाद भी शहीदों की स्मृति में नहीं बन सका स्मारक

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नंदगंज के इंदरा बालिका स्कूल में उपे​क्षित शहीद स्तम्भ। संवाद
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नंदगंज। स्वतंत्रता की लड़ाई में क्षेत्र के वीर सपूतों ने भी अहम योगदान दिए थे। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के करो या मरो के आंदोलन में 18 अगस्त 1942 को यहां के क्रांतिकारियों ने पहले नंदगंज थाने में तिरंगा फहराने की योजना बनाई, लेकिन तत्कालीन नंदगंज थानाध्यक्ष विजय शंकर की दोहरी चाल के चलने पर क्रांतिकारियों ने नंदगंज रेलवे स्टेशन पर खड़ी मालगाड़ी के 52 डिब्बे लूट लिए थे। इसकी सूचना पर मौके पर पहुंचे अंग्रेजों ने क्रांतिकारियों पर 175 राउंड गोलियां दागी थी, जिसमे 100 से अधिक क्रांतिकारी शहीद हुए और हजारों घायल हो गए थे। दुखद ये है कि आज तक इन शहीदों की स्मृति में नंदगंज में शहीद स्मारक भी नहीं बनाया जा सका।अगस्त क्रांति का ऐलान होने के बाद नंदगंज क्षेत्र के लोगों का भी खून उबल उठा। समाजसेवी भोला सिंह के नेतृत्व में नैसारा के पहलवान रामधारी यादव समेत हजारों लोग भारत माता की जय का उदघोष करते हुए नंदगंज थाने पर तिरंगा फहराने पहुंच गए थे। वहां के थानाध्यक्ष विजय शंकर पांडेय ने स्टेशन पर खड़ी मालगाड़ी की ओर इशारा कर लोगों को उसे लूटने के लिए प्रेरित कर दिया था। भीड़ मालगाड़ी की ओर बढ़ गई। इधर मैनपुर से श्यामनरायन सिंह ,करंडा से बचाई सिंह और बलुआ से राम परिखा सिंह आदि भी टोलिया लेकर पहुंच गए थे। बेलासी के डोमा लोहार ने हथौड़े एवं छेनी से मालगाड़ी के सभी डिब्बे के ताले तोड़ डाले थे। उधर स्टेशन से तीन किलोमीटर दूर पुलिया तोड़ दिए जाने से रेल मार्ग बंद हो गया था। उसे ठीक करते हुए अंग्रेज भी मौके पर पहुंच गए थे। नंदगंज थानाध्यक्ष ने दोहरी चाल चली उसने तत्कालीन डीएम और एसपी को इसकी सूचना दे दी थी। मौके पर अंग्रेजों की भारी फोर्स पहुंच गई और गोलाबारी होने लगी। दर्जनों लोगों को पुलिस ने कतार में खड़ा करके गोलियों से भून डाला।
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गोलीकांड में 80 लोगों के शहीद होने की पुष्टि भारत छोड़ो आंदोलन के स्वर्ण जयंती के अवसर पर मुंबई दूरदर्शन ने प्रसारण के जरिये किया गया था। आजादी में इतनी बड़ी घटना के बाद भी यह स्थान अब तक उपेक्षित है। स्वतंत्रता मिलने के एक वर्ष बाद नंदगंज लूट के नायक बाबू भोला सिंह शहीद हुए क्रांतिकारियों के याद में उस स्थान पर शहीद स्मारक इंटर काॅलेज स्थापित किया था। कॉलेज में प्रत्येक वर्ष 18 अगस्त को शहीदों की याद कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। स्वतंत्रता सेनानी बाबू भोला सिंह के पौत्र मोती सिंह ने बताया कि मालगाड़ी लूट के बाद वे अपने घर पहुंचे थे कि अंग्रेज उन्हें खोजते हुए वहां पहुंच गए थे। इस दौरान भोला सिंह वहां से निकल चुके थे। अंग्रेजों ने गुस्से में घर ही नहीं मंदिर को भी तोड़ डाला था। मोती सिंह ने बताया कि शहीदों की आजतक मूर्ति स्थापित नहीं कराई गई।
देखरेख के अभाव में उपेक्षित शहीद स्तंभ -नंदगंज। भारत को आजाद कराने को जिन स्वतंत्रता सेनानियों ने कुर्बानी दी, आज उनके स्तंभों की भी देखभाल करने में लापरवाही बरती जा रही है। ईशोपुर स्थित इंदिरा बालिका उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण में लगा शहीद स्तंभ उपेक्षा का शिकार हो गया है। ब्रिटिश हुकूमत से कड़ा संघर्ष करने के बाद देश को आजादी दिलाने वाले स्वतंत्रता सेनानियों की यादें अब राष्ट्रीय पर्वों तक ही सीमित होकर रह गई हैं। स्तंभ पर जहां काई जम चुकी है, वहीं आसपास गंदगी फैली हुई है। स्तंभ शिलालेख पर वर्ष 1923-42 के दौरान ब्रिटिश हुकूमत से लोहा लेने वाले जालंधर सिंह को छोड़कर शेष अन्य सेनानियों के नाम मिट चुके हैं।
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