परीक्षा में नकल की सुविधा मुहैया कराकर मनचाहे परिणाम दिलाने का ठेका लेने वाले रैकेट के काले कारनामे का खुलासा वर्ष 2016 में उस समय हुआ था, जब पालीटेक्निक की प्रदेश स्तर पर हुई संयुक्त प्रवेश परीक्षा में राजेंद्र कुशवाहा के भाई पारस कुशवाहा के विद्यालय के एक ही कमरे के 12 छात्रों ने प्रदेश में टॉप किया था।
जांच के बाद सारा माजरा जब सामने आया तो 28 छात्रों की प्रवेश परीक्षा निरस्त कर दी गई थी। इस मामले में पारस कुशवाहा सहित अन्य जेल भी भेजे गए थे। उनके खिलाफ गैंगेस्टर की कार्रवाई भी हुई थी। यही नहीं बुद्धम शरणम इंटर कालेज में हुई टेट परीक्षा में सामूहिक नकल पकड़ी गई थी। यह कार्रवाई एसटीएफ की वाराणसी यूनिट ने की थी। इस दौरान भी पारस कुशवाहा को जेल जाना पड़ा था।
बीते वर्ष अगस्त माह में जिला प्रशासन के आदेश पर राजेंद्र कुशवाहा के भाई पारस कुशवाहा के प्रबंधन वाले शिक्षण संस्थान बुद्धम शरणम इंटर कालेज, ग्लोरियस पब्लिक स्कूल आदर्श गांव छावनी लाइन के अलावा फतेहउल्लाहपुर स्थित डिग्री कालेज की बिल्डिंग और दस भूखंड और छह बाइक, चार लग्जरी वाहन कुर्क किए गए थे।
वह कार्रवाई भी गैंगेस्टर एक्ट के तहत हुई थी। उन संपत्तियों की कीमत 12 करोड़ 31 लाख 59 हजार आंकी गई थी। अब तक गैंग के लीडर पारस कुशवाहा की 12 करोड़ 31 लाख और महेंद्र कुशवाहा की पांच करोड़ 94 लाख और राजेंद्र कुशवाहा की नौ करोड़ 57 लाख की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है।