शादियाबाद। पति-पत्नी के बीच झगड़ा और कहासुनी हर घर में होता है, लेकिन पता नहीं कल्पू के दिमाग में क्या आया कि उसने अपना जीवन ही समाप्त करने का निर्णय ले लिया। पति नहीं रहेगा तो मैं जिंदा रहकर क्या करूंगी, शायद यही सोचकर पत्नी किरन ने भी पति द्वारा छोड़े गए जहर को पी लिया। पति तो उसका साथ छोड़कर चला गया, लेकिन वह जिंगदी और मौत के बीच जूझ रही है। कमाकर दो वक्त की रोटी देने वाला तो चला गया, अब कैसे भरेगा परिवार का पेट। बड़ा बेटा प्रिंस पिता की मौत के बाद सुुधबुुध खो बैठा है। उसे अब मां की चिंता सता रही है।
गांव में लोग कहते रहे कि कल्पू चौहान मेहनत-मजदूरी कर पत्नी किरन और बच्चों के साथ खुशी-खुशी रहता था। प्रिंस (12), शुभम (10) और रोहित (07) को पढ़ाने के लिए वह प्रयासरत रहता। पूरे परिवार का पालन-पोषण उसी के जिम्मे था। गरीबी की वजह से आए दिन पति-पत्नी में कहासुनी होती रहती थी, लेकिन इस कहासुनी का अंजाम इस कदर कल्पू के परिवार और अन्य लोगों के सामने आएगा, यह किसी ने नहीं सोचा था। बुधवार को कल्पू विवाद के बाद कहीं से विषाक्त पदार्थ लाया और उसमें नींबू निचोड़कर आधा पी गया। यह देखकर पत्नी किरन की सांसें ऊपर-नीचे होने लगी। शायद उसने यह सोचकर बचा आधा जहर पी लिया कि जब पति ही नहीं रहेगा तो वह जी कर क्या करेगी। गांव वाले ऊपर वाले से यही मनाते रहे कि पिता चला गया अब किसी तरह मां किरन की जान बच जाए। अगर वह भी नहीं रही तो बच्चे पूरी तरह अनाथ हो जाएंगे। कमाने वाला पिता तो इस दुनिया से चला गया। अब परिवार का पालन-पोषण के लिए नन्हीं सी जान प्रिंस को ही अपना हाथ मजबूत करना पड़ेगा।
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