कलेक्टर घाट में गंगा में गिरता नाले का गंदा पानी।
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गाजीपुर। नगर के 25 छोटे बड़े नाले गंगा को प्रदूषित करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ऐसे में जहां घाटों पर लोग अब नहाने से कतराने लगे हैं तो वहीं गंगा को स्वच्छ बनाने का अभियान भी मूर्तरूप लेता नहीं दिख रहा है। उधर, नालों में जाली लगाने को लेकर पालिका प्रशासन अलग कोताही बरत रहा है। एक तरफ केंद्र एवं प्रदेश सरकार गंगा को अविरल एवं निर्मल बनाने के लिए अभियान चला रही है। वहीं दूसरी तरफ सरकारी मुलाजिम इसमें अपनी सहभागिता से दूरी करते दिख रहे हैं। करीब छह माह पूर्व जिला प्रशासन की ओर से नगर पालिका को नालों में जाली लगाने का निर्देश दिया गया था। उन आदेश एवं निर्देश को ताक पर रखकर न तो किसी नाले में जाली ही लगी और न ही गंदे पानी को साफ करने की योजना बनाई जा सकी। ऐसे में शहर का हजारों लीटर गंदा पानी बिना स्वच्छ हुए गंगा के पवित्र जल में मिल कर उसे प्रदूषित कर रहा है। नगर के ददरीघाट में नाले से गिर रहा गंदा पानी गंगा के किनारे ऐसा फैला है कि वहां गंदे पानी की दूसरी नदी बन गई है। अष्टभुजा कालोनी निवासी मनीष श्रीवास्तव और सकलेना बाद निवासी रामदेव पांडेय ने बताया कि गंगा में गिर रहे नालों के पानी को रोकने के लिए अभी तक कोई योजना नहीं बनाई गई। से गंगा में स्नान करने वाले लोगों को इसी पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। पानी से उठ रही दुर्गंध से लोग वहां एक मिनट भी नहीं ठहर सकते। झुन्नूलाल चौराहा निवासी नवीन और स्टीमर घाट निवासी दिनेश ने बताया कि कलेक्टर घाट की स्थिति तो और भी खराब है। घाट के आस-पास गंदगी के साथ ही नाले का पानी सीधे गंगा में जा रहा है। ऐसे में इस घाट पर भी स्नान करने में श्रद्धालु कतरा रहे हैं।
कोट
गंगा में गिरने वाले नालों में जाली लगाई गई थी, लेकिन बीते वर्ष बाढ़ आने से बह गई। ऐसे में एक बार फिर जाली लगाने का कार्य जल्द ही शुरु होगा, जिससे स्नान करने वाले श्रद्धालुओं को दिक्कत न हो- विवेक कुमार बिंद, जेई नगर पालिका परिषद