गाजीपुर। राहत की खबर यह है कि गंगा में घटाव शुरू हो गया है। गंगा का जलस्तर एक सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से घट रहा है। हालांकि बाढ़ के कहर के कारण प्रभावित गांवों में दुश्वारियां बरकरार हैं। बाढ़ के पानी को देखते हुए सुरक्षा की दृष्टि से रेवतीपुर क्षेत्र के 10 स्कूलों को बंद कर दिया गया है। इससे संबंधित क्षेत्रों के बच्चों का पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। रेवतीपुर इलाके के बाढ़ प्रभावित गांवों में दो-दो नाव की व्यवस्था की गई है। इसी के जरिए ग्रामीण आवागमन कर रहे हैं।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार बुधवार को सुबह नौ बजे से गंगा में घटाव शुरू हो गया था। बीते मंगलवार की रात आठ बजे गंगा का जलस्तर 63.660 मीटर पर स्थिर हो गया था। सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 63.670 व शाम चार बजे 63.620 मीटर दर्ज किया गया। हालांकि अभी भी गंगा खतरे के निशान 63.105 मीटर से 30 सेमी ऊपर बह रही है। इस कारण जिन गांवों में बाढ़ का पानी है, वहां ग्रामीणों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिले के पांच तहसीलों सदर, सेवराई, मुहम्मदाबाद, सैदपुर व जमानिया के 20 गांव बाढ़ प्रभावित गांवों की श्रेणी में शामिल हैं। बाढ़ से 20 हजार से अधिक की आबादी प्रभावित है। जबकि एक हजार बीघे की खेती प्रभावित हुई है।
बाईपास मार्ग पर 10 फीट तक पसरा पानी
रेवतीपुर-गहमर बाईपास मार्ग पर 10 फीट तक बाढ़ का पानी पसरा हुआ है। यहां पर जिला प्रशासन की ओर से नाव का संचालन कराया जा रहा है। बाईपास मार्ग के जलमग्न होने के कारण कई गांवों पर असर पड़ा है। वहीं रेवतीपुर-साधोपुर उर्फ रामपुर मार्ग पर तीन फीट तक बाढ़ का पानी पसरा हुआ है। इसके बावजूद लोग उस मार्ग से आवागमन कर रहे हैं। मार्ग पर बाढ़ का पानी उफान पर है, लेकिन, ट्रैक्टर, साइकिल से लेकर लोग पैदल आवागमन कर रहे हैं। ऐसे में अनहोनी घटित होने की आशंका मंडरा रही है।
इन स्कूलों को किया गया बंद
रेवतीपुर के खंड शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार गौतम ने बताया कि बाढ़ का पानी क्षेत्र के कई गांवों में पसरा हुआ है। ऐसे में सुरक्षा की दृष्टि के तहत 10 विद्यालयों को बंद कर दिया गया है। इनमें हसनपुरा प्राथमिक विद्यालय, अठहठा कंपोजिट स्कूल, नसीरपुर प्राथमिक विद्यालय, वीरऊपुर कंपोजिट स्कूल, दुल्लहपुर उच्च प्राथमिक विद्यालय, नारायणपुर प्राथमिक विद्यालय, रेवतीपुर उत्तरी प्राथमिक विद्यालय, लखीमपुर प्राथमिक विद्यालय, तिलवा उच्च प्राथमिक विद्यालय व साधोपुर उर्फ रामपुर कंपोजिट विद्यालय शामिल है। उन्होंने बताया कि शिक्षकों को बीआरसी से ही छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन शिक्षा देने के लिए कहा गया है। दूसरी तरफ निजी स्कूलों में अर्धवार्षिक परीक्षाएं चल रही हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों के बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। इसके कारण उनका पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है।
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राहत सामग्री से निकले कीड़े
करंडा। दीनापुर राहत कैंप से बीते सोमवार को तुलसीपुर, महाबलपुर, शेरपुर, रफीपुर, दीनापुर, बड़हरिया सहित आदि गांवों में राहत सामग्री के पैकेट का वितरण ग्रामीणों में किया गया था। एक ग्रामीण को 10 किलो आटा, चावल, दो किलो दाल, चना, गुड़, 500 ग्राम नमक, एक लीटर रिफाइन, 250 ग्राम हल्दी, मिर्च व धनिया दिया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि चना व आटे के पैकेट खोलने में उनके कीड़े पाए गए। वहीं क्षेत्र में बाजरा, अरहर, परवल, मिर्चा, बैंगन आदि की 40 बीघा खेती बाढ़ से प्रभावित हुआ है।
ढाई बीघा भूमि नदी में समाई
भांवरकोल। शेरपुर मौजा में कटान जारी है। ढाई बीघा खेत कटान से गंगा में समा गया। फिरोजपुर, धर्मपुरा, पचासी और सत्तर डेरा बाढ़ के पानी से घिरा है। खेतों में ज्वार, बाजरा, तिल, मिर्च, टमाटर की फसल चौपट हो गई है। धर्मपुरवा पुल के पास प्रशासन की ओर से तीन नावों की व्यवस्था कराई गई। कठार, आमघाट, नकटीकोल, रानीपुर, फखनपुरा, कबीरपुर, कुंडेसर, शेरपुर खुर्द, लालूपुर, जयनगर आदि गांवों में 40 प्रतिशत फसल बाढ़ के पानी से बर्बाद हुई है।
उफनाने लगी कर्मनाशा, गांवों में घुसने लगा पानी
जमानिया। गंगा का रौद्र रूप थमते ही कर्मनाशा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। इससे क्षेत्र के तटवर्ती इलाकों के गांवों में बाढ़ का पानी तेजी से घुस रहा है। तटवर्ती गायघाट, धुस्का बाढ़ से घिर गया है। देवढ़ी, जबुरना, घरोहिया सहित अन्य गांवों में बाढ़ तेजी से अपना पाव पसार रही है। गायघाट गांव के अंदर तक बाढ़ का पानी घुस गया है। संपर्क मार्ग डूब गया है। धुस्का गांव का मल्लाह बस्ती व मुसहर बस्ती बाढ़ से घिर गया है। देवढ़ी स्थित राम-जानकी मंदिर बाढ़ से घिर गया है। दोपहर से ही नदी में बढ़ाव शुरू हुआ है। उपजिलाधिकारी अभिषेक कुमार राजस्व टीम के साथ गायघाट व धुस्का गांवों का निरीक्षण किया। बाढ़ प्रभावित गांवों में नाव की व्यवस्था करने का निर्देश दिया। संवाद